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Education – माध्यमिक स्तर पर बीच में ही पढ़ाई छोड़ रहे हैं सात फीसदी छात्र

Education – देश में स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन माध्यमिक स्तर पर विद्यार्थियों के पढ़ाई बीच में छोड़ने की चुनौती अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। नवीनतम शैक्षणिक आंकड़ों के अनुसार, कक्षा 9 और 10 के स्तर पर राष्ट्रीय औसत ड्रॉपआउट दर सात फीसदी दर्ज की गई है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक 100 विद्यार्थियों में से लगभग सात छात्र अपनी स्कूली शिक्षा पूरी किए बिना पढ़ाई छोड़ देते हैं और बड़ी संख्या में आगे किसी अन्य संस्थान में भी दाखिला नहीं लेती।

कर्नाटक में सबसे अधिक दर्ज हुई ड्रॉपआउट दर

रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक स्तर पर कर्नाटक की स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बताई गई है, जहां ड्रॉपआउट दर 18.1 फीसदी दर्ज की गई। इसके बाद गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी अपेक्षाकृत अधिक विद्यार्थी स्कूल छोड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि माध्यमिक शिक्षा के दौरान आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक कारण कई विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित करते हैं, जिन पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता है।

उत्तर भारत के कई राज्यों में दिखा सुधार

आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में माध्यमिक स्तर पर स्थिति कई अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर रही है। उत्तर प्रदेश में ड्रॉपआउट दर 8.4 फीसदी, बिहार में 9 फीसदी, राजस्थान में 8.8 फीसदी और मध्य प्रदेश में 13 फीसदी दर्ज की गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न योजनाओं और जागरूकता अभियानों के कारण कई राज्यों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है, हालांकि अभी भी सुधार की पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है।

नई रिपोर्ट में दर्ज हुए महत्वपूर्ण संकेत

वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट बताती है कि प्रारंभिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक तीनों स्तरों पर ड्रॉपआउट दर में लगातार कमी आई है। इसके बावजूद माध्यमिक शिक्षा अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022-23 में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 13.8 फीसदी थी, जो 2023-24 में घटकर 10.9 फीसदी रह गई। इसके बाद 2024-25 और 2025-26 में भी इसमें लगातार गिरावट दर्ज हुई और राष्ट्रीय औसत सात फीसदी तक पहुंच गया।

प्रारंभिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर बेहतर स्थिति

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं में स्थिति पहले की तुलना में काफी सुधरी है। उच्च प्राथमिक स्तर पर वर्ष 2022 में जहां ड्रॉपआउट दर 8.1 फीसदी थी, वहीं अब यह घटकर 3.6 फीसदी रह गई है। इसी तरह प्राथमिक स्तर पर यह दर 8.7 फीसदी से घटकर 1.8 फीसदी तक पहुंच गई है। इससे संकेत मिलता है कि शुरुआती कक्षाओं में विद्यार्थियों को स्कूल से जोड़े रखने के प्रयास अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी रहे हैं।

संसद में पेश आंकड़ों में भी दिखा बदलाव

16 मार्च 2026 को संसद में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर में लगातार कमी दर्ज की गई। वहीं कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसके विपरीत स्थिति देखने को मिली। रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और चंडीगढ़ में इस अवधि के दौरान ड्रॉपआउट दर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्यवार रणनीति तैयार करना इस चुनौती से निपटने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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