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FuelAdulteration – मिलावटी ईंधन पर कार्रवाई तेज, फिर भी जांच की रफ्तार पर उठे सवाल…

FuelAdulteration – उत्तर प्रदेश में मिलावटी ईंधन को लेकर उपभोक्ताओं की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल के दिनों में कई वाहन चालकों ने शिकायत की है कि उनकी बाइक और स्कूटी चलते-चलते अचानक बंद हो गईं। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है और कथित रूप से मिलावटी पेट्रोल से जुड़े एक टैंकर को भी कब्जे में लिया है। हालांकि, उपभोक्ताओं का कहना है कि ईंधन की गुणवत्ता की निगरानी करने वाले संबंधित विभागों की ओर से अभी भी व्यापक स्तर पर जांच नहीं दिखाई दे रही है।

रास्ते में बंद हुए कई वाहन

रविवार को आलमबाग निवासी संतोष कुमार की बाइक सफर के दौरान अचानक बंद हो गई। वाहन को मिस्त्री के पास ले जाने पर बताया गया कि इंजन का पिस्टन जाम हो चुका है और उसे बदलना पड़ेगा। इसी तरह तजिंदर सिंह सहित कई अन्य लोगों ने भी बीच रास्ते में बाइक और स्कूटी बंद होने की शिकायत की। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने वाहन चालकों की चिंता बढ़ा दी है।

उपभोक्ताओं ने उठाए गुणवत्ता पर सवाल

वाहन मालिकों का कहना है कि यदि निर्धारित स्तर तक Ethanol Blending से वाहनों पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता, तो फिर इंजन खराब होने की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं। कई उपभोक्ताओं ने आशंका जताई कि कहीं स्थानीय स्तर पर पेट्रोल में अन्य पदार्थ मिलाकर उसकी गुणवत्ता से समझौता तो नहीं किया जा रहा। उनका कहना है कि इस पहलू की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

व्यापक जांच की उठी मांग

लोगों का मानना है कि केवल एक-दो मामलों में कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि सभी पेट्रोल पंपों से नियमित रूप से ईंधन के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं हुई तो मिलावट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना मुश्किल होगा और आम लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

उपभोक्ताओं ने रखी अपनी बात

राजाजीपुरम के मुमताज अहमद का कहना है कि यदि ईंधन के कारण वाहन खराब हो रहे हैं तो इसकी वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए। वहीं अमीनाबाद निवासी सुरेश छबलानी का कहना है कि Ethanol Blending लागू होने के बाद पुराने वाहनों के माइलेज और इंजन की कार्यक्षमता को लेकर कई वाहन मालिक सवाल उठा रहे हैं। नाका क्षेत्र के नीलेश अग्रवाल ने सुझाव दिया कि सरकार नियमित सैंपलिंग कराए ताकि यदि कहीं मिलावट हो रही है तो उसका समय रहते पता लगाया जा सके।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

राज्य में मिलावटी पेट्रोल और डीजल से जुड़े मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। वर्ष 2017 में लखनऊ के कई पेट्रोल पंपों पर घटतौली की शिकायतों पर कार्रवाई हुई थी। वर्ष 2022 में मोहनलालगंज क्षेत्र में कथित मिलावटी ईंधन का मामला सामने आया। इसके बाद 2025 में सरोजनीनगर और सैरपुर क्षेत्र में भी पुलिस ने मिलावटी पेट्रोल से जुड़े मामलों का खुलासा किया था। इन घटनाओं के बाद उपभोक्ताओं का कहना है कि नियमित निगरानी और कड़ी जांच से ही इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

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