TransportVigilance – यूपी परिवहन विभाग के कई अधिकारी विजिलेंस की जांच के दायरे में…
TransportVigilance- उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग से जुड़े कई अधिकारियों की संपत्ति और आय के स्रोतों को लेकर विजिलेंस की जांच तेज हो गई है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, विभाग के कुछ अधिकारियों पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने, कथित अनियमित वित्तीय लेनदेन और बिचौलियों के माध्यम से अवैध वसूली जैसे आरोपों की जांच की जा रही है। फिलहाल एजेंसियां विभिन्न दस्तावेजों, संपत्तियों और वित्तीय रिकॉर्ड का सत्यापन कर रही हैं।

कई अधिकारियों की संपत्तियों की हो रही जांच
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दायरे में आए कुछ अधिकारियों के नाम पर होटल, रिजॉर्ट, फार्महाउस, पेट्रोल पंप और कृषि भूमि जैसी संपत्तियां होने की जानकारी सामने आई है। विजिलेंस टीम इन परिसंपत्तियों के स्वामित्व, निवेश के स्रोत और घोषित आय के साथ उनके संबंधों की पड़ताल कर रही है। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक स्तर पर कई अधिकारियों को निगरानी सूची में रखा गया है।
32 अधिकारियों पर विशेष नजर
विभागीय सूत्रों का दावा है कि आरटीओ, एआरटीओ और आरआई स्तर के कुल 32 अधिकारियों की गतिविधियों की विशेष रूप से समीक्षा की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि संबंधित अधिकारियों की संपत्ति उनके वैध आय स्रोतों के अनुरूप है या नहीं। हालांकि, इन मामलों में अभी जांच जारी है और किसी भी अधिकारी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष या न्यायिक निर्णय सामने नहीं आया है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
इससे पहले पूर्व एआरटीओ ललित कुमार के आवास पर विजिलेंस की छापेमारी चर्चा में रही थी। उस कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में सोना, चांदी और अन्य संपत्तियां मिलने का दावा किया गया था। इसके अलावा परिवहन विभाग के कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी समय-समय पर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आते रहे हैं। संबंधित मामलों में जांच एजेंसियां अपनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर रही हैं।
बिचौलियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट और अन्य परिवहन सेवाओं से जुड़े कार्यों में कथित रूप से बिचौलियों की सक्रिय भूमिका की भी जांच की जा रही है। आरोप है कि कुछ मामलों में आवेदनों के निस्तारण के लिए निर्धारित सरकारी शुल्क के अलावा अवैध धन वसूले जाने की शिकायतें मिली हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है।
आय के स्रोतों का किया जा रहा सत्यापन
जांच एजेंसियां अधिकारियों के बैंक खातों, निवेश, अचल संपत्तियों और अन्य वित्तीय लेनदेन का मिलान उपलब्ध अभिलेखों से कर रही हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि घोषित आय और अर्जित संपत्तियों के बीच कोई असंगति तो नहीं है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच पूरी होने के बाद होगी आगे की कार्रवाई
विजिलेंस विभाग का कहना है कि सभी मामलों की निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर जांच की जा रही है। किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी या दोष का निर्धारण जांच पूरी होने और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही किया जाएगा। फिलहाल जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल में जुटी हैं और आवश्यक जानकारी एकत्र की जा रही है।