OilPrice – सऊदी अरब ने घटाए कच्चे तेल के दाम, भारत को मिल सकता है बड़ा लाभ
OilPrice- दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातक देशों में शामिल सऊदी अरब ने अगस्त महीने के लिए अपने प्रमुख अरब लाइट क्रूड की कीमत में बड़ी कटौती करने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि यह पिछले करीब 26 वर्षों की सबसे बड़ी मूल्य कटौती में से एक है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में नई हलचल देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सकारात्मक असर उन देशों पर पड़ सकता है जो अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं, जिनमें भारत भी शामिल है।

एशियाई बाजार को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला
सऊदी अरब ने एशियाई खरीदारों के लिए अरब लाइट क्रूड की कीमत ओमान-दुबई बेंचमार्क से 1.50 डॉलर प्रति बैरल कम तय की है। इससे पहले जुलाई के लिए भी कीमतों में उल्लेखनीय कमी की गई थी। विश्लेषकों का मानना है कि एशियाई बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति मजबूत बनाए रखने और ग्राहकों को आकर्षित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
बढ़ती आपूर्ति से बाजार पर बना दबाव
हाल के दिनों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ी है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने के बाद आपूर्ति में तेजी आई है। इसके साथ ही ओपेक+ समूह और उसके सहयोगी देशों ने अगस्त से प्रतिदिन लगभग 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। अधिक उत्पादन और बेहतर आपूर्ति के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 71.7 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
कीमतों में कटौती के पीछे क्या हैं प्रमुख कारण
ऊर्जा बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। खाड़ी क्षेत्र के कई उत्पादक देशों ने उत्पादन बढ़ाया है, जबकि संयुक्त अरब अमीरात सहित अन्य निर्यातकों ने भी आपूर्ति सामान्य स्तर पर पहुंचा दी है। ऐसे माहौल में सऊदी अरब ने अपने बाजार हिस्से को बनाए रखने और एशियाई ग्राहकों के बीच प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करने के लिए कीमतों में कमी का रास्ता चुना है।
भारत की अर्थव्यवस्था को कैसे मिल सकता है फायदा
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से रिफाइनरियों की खरीद लागत कम हो सकती है। इसका लाभ तेल विपणन कंपनियों को मिल सकता है, जो पिछले कुछ समय से ईंधन और रसोई गैस की बिक्री में लागत संबंधी दबाव का सामना कर रही हैं। यदि वैश्विक कीमतों में नरमी बनी रहती है, तो सरकार पर एलपीजी सब्सिडी का वित्तीय बोझ भी कुछ कम हो सकता है।
महंगाई पर भी पड़ सकता है सकारात्मक असर
कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में कमी का प्रभाव केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहता। परिवहन, बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों की लागत घटने से वस्तुओं की ढुलाई सस्ती हो सकती है, जिससे महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव कई अन्य कारकों, जैसे कर व्यवस्था, सरकारी नीति और तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण पर भी निर्भर करेगा।