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CyberSecurity – यूजरनेम फीचर पर सरकार ने WhatsApp समेत प्लेटफॉर्म्स से मांगा जवाब

CyberSecurity – एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर बढ़ती साइबर सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने WhatsApp के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार का मानना है कि यदि इस सुविधा का दुरुपयोग हुआ तो साइबर अपराधियों के लिए अपनी पहचान छिपाना और लोगों को निशाना बनाना आसान हो सकता है। इसी वजह से इस विषय पर विस्तृत जानकारी मांगी गई है। अधिकारियों के अनुसार, इसी तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले अन्य प्लेटफॉर्म भी सरकार की समीक्षा के दायरे में हैं।

यूजरनेम फीचर को लेकर सरकार की चिंता

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने एक उद्योग सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि WhatsApp, Signal और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजरनेम आधारित पहचान व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे हैं। सरकार का मानना है कि यदि किसी उपयोगकर्ता की वास्तविक पहचान आसानी से सत्यापित नहीं हो पाती, तो इससे ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और अन्य साइबर अपराधों का खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण संबंधित कंपनियों से इस विषय पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

पहचान छिपाने का बढ़ सकता है जोखिम

अधिकारियों के अनुसार, यूजरनेम आधारित व्यवस्था का गलत इस्तेमाल कर अपराधी किसी दूसरे व्यक्ति का प्रतिरूपण कर सकते हैं या अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर लोगों को धोखा देने की कोशिश कर सकते हैं। सरकार का उद्देश्य किसी सुविधा पर रोक लगाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बनी रहे। इसी दिशा में तकनीकी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स डेटा लीक की भी जांच जारी

एस. कृष्णन ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े कथित डेटा लीक के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सरकार को इस संबंध में जानकारी मिली है और मामले की जांच की जा रही है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कंपनी से जुड़ी कुछ संवेदनशील आंतरिक जानकारी ऑनलाइन सामने आई है। चूंकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स वैश्विक तकनीकी आपूर्ति शृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है और भारत में Apple के लिए iPhone के पुर्जों का निर्माण करती है, इसलिए इस मामले के साइबर सुरक्षा पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है।

WhatsApp की प्रतिक्रिया पर नहीं मिली पुष्टि

जब मंत्रालय के सचिव से पूछा गया कि क्या WhatsApp ने जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है, तो उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसी किसी जानकारी की पुष्टि नहीं है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार को अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है। अधिकारियों को उम्मीद है कि संबंधित कंपनियां समय पर अपना पक्ष स्पष्ट करेंगी, ताकि आवश्यक समीक्षा आगे बढ़ाई जा सके।

VPN नियमों पर भी चल रहा विचार

वीपीएन सेवाओं के नियमन को लेकर भी सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है। एस. कृष्णन ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि तकनीकी समाधान भी उतने ही जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा नियमों के तहत भारत में सेवाएं देने वाले VPN प्रदाताओं के लिए पंजीकरण आवश्यक है। हालांकि कई कंपनियां विदेश से सेवाएं संचालित करती हैं, जिससे नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सरकार इस दिशा में कानूनी और तकनीकी दोनों स्तरों पर समाधान तलाश रही है।

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