Transport – ड्राइविंग लाइसेंस में बैकलॉग एंट्री पर सख्ती, फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
Transport – ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड में गड़बड़ी रोकने के लिए परिवहन विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है। अब किसी भी ड्राइविंग लाइसेंस की बैकलॉग एंट्री केवल उसी परिवहन कार्यालय से की जा सकेगी, जहां से मूल लाइसेंस जारी हुआ था। विभाग का मानना है कि इस बदलाव से रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ेगी और विभिन्न राज्यों या जिलों के माध्यम से होने वाली कथित अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

नई व्यवस्था के तहत बदला गया पोर्टल
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन के निर्देश पर सारथी पोर्टल में आवश्यक तकनीकी बदलाव किए गए हैं। नई व्यवस्था के अनुसार यदि किसी व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस किसी विशेष आरटीओ या एआरटीओ कार्यालय से जारी हुआ है, तो उसकी बैकलॉग एंट्री भी उसी कार्यालय में ही की जाएगी। अब किसी अन्य जिले या राज्य से ऐसी प्रविष्टि की अनुमति नहीं होगी। विभाग का कहना है कि इससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और सुरक्षा दोनों मजबूत होंगी।
फर्जीवाड़े की शिकायतों के बाद उठाया गया कदम
परिवहन विभाग के अनुसार, पिछले कुछ समय में बैकलॉग एंट्री प्रक्रिया के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आई थीं। जांच में यह पाया गया कि कुछ मामलों में दूसरे राज्यों से बैकलॉग एंट्री कराकर लाइसेंस रिकॉर्ड में बदलाव किए जा रहे थे। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की और अब तकनीकी स्तर पर ऐसी संभावनाओं को सीमित करने के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है।
मंजूरी के बिना नहीं होगी कोई प्रविष्टि
नई व्यवस्था के तहत बैकलॉग एंट्री के लिए सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति अनिवार्य कर दी गई है। संबंधित राज्य के परिवहन सचिव या परिवहन आयुक्त की पूर्व अनुमति के बिना ऐसी प्रविष्टि नहीं की जा सकेगी। इसके अलावा निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद बैकलॉग एंट्री की सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा सारथी पोर्टल पर बैकलॉग रिकॉर्ड को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया जाएगा, जिससे भविष्य में ऑडिट और सत्यापन की प्रक्रिया अधिक आसान होगी।
पुराने रिकॉर्ड भी किए जाएंगे अपडेट
परिवहन विभाग ने पुराने वाहनों और लाइसेंसों के रिकॉर्ड को राष्ट्रीय रजिस्टर से जोड़ने पर भी जोर दिया है। जिन वाहनों का विवरण अभी तक डिजिटल रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपडेट किया जाएगा। वाहन स्क्रैपिंग से जुड़े मामलों में भी बैकलॉग एंट्री का प्रावधान जारी रहेगा, लेकिन इसे संबंधित वाहन स्वामी या अधिकृत स्क्रैप सेंटर संचालक द्वारा दर्ज किया जाएगा। अंतिम स्वीकृति संबंधित आरटीओ कार्यालय की ओर से ही दी जाएगी।
डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा होगी मजबूत
अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगाना ही नहीं, बल्कि पूरे ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन रिकॉर्ड सिस्टम को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना भी है। विभाग को उम्मीद है कि इस बदलाव से भविष्य में रिकॉर्ड सत्यापन, प्रशासनिक निगरानी और डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा नागरिकों को अधिक भरोसेमंद परिवहन सेवाएं मिल सकेंगी।