उत्तराखण्ड

RiverLevel – भागीरथी का बढ़ता जलस्तर, हर्षिल के ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

RiverLevel – उत्तरकाशी जिले के हर्षिल क्षेत्र में भागीरथी नदी का लगातार बढ़ता जलस्तर स्थानीय लोगों की चिंता का कारण बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष आई आपदा के बाद से क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो पाया है और नदी के कटाव के चलते कई सरकारी भवनों, बागानों तथा आवासीय क्षेत्रों पर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति को देखते हुए हर्षिल क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर जल्द सुरक्षात्मक कार्य कराने की मांग की है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई सुरक्षा की गुहार

मंगलवार को हर्षिल क्षेत्र के आठ गांवों के प्रधान, पूर्व जनप्रतिनिधि और ग्रामीण जिलाधिकारी प्रशांत आर्य से मिले। प्रतिनिधिमंडल में शामिल पूर्व प्रधान बसंती नेगी ने प्रशासन से कहा कि क्षेत्र के लोगों में लगातार भय का माहौल बना हुआ है और सुरक्षा के स्थायी इंतजाम जल्द किए जाने चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का बढ़ता जलस्तर उन्हें रातभर जागकर निगरानी करने के लिए मजबूर कर रहा है।

कटाव से कई स्थानों पर खतरा

ग्रामीणों के अनुसार पिछले वर्ष की आपदा के बाद बनी झील और भागीरथी नदी के तेज कटाव से कई महत्वपूर्ण स्थान जोखिम की जद में हैं। उनका कहना है कि हाल के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से जीएमवीएन परिसर का टिनशेड बह गया था। इसके बाद कई पेड़ भी नदी में गिर गए, जिससे कुछ समय के लिए नदी का प्रवाह प्रभावित हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा कार्य नहीं हुए तो पुलिस थाना, लोक निर्माण विभाग का गेस्ट हाउस, सेब के बगीचे, होटल, होमस्टे और आसपास की बस्तियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

सुरक्षा दीवार बनाने की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष नदी किनारे लगभग 400 वायरक्रेट संरचनाएं बनाने की मांग रखी है। उनका कहना है कि इससे नदी के कटाव को रोकने और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा में मदद मिल सकती है। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि मानसून के दौरान जलस्तर तेजी से बढ़ने की संभावना बनी रहती है, इसलिए सुरक्षात्मक कार्यों में देरी नुकसान को बढ़ा सकती है।

अधिकारियों ने किया स्थलीय निरीक्षण

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने हर्षिल क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने नदी के बहाव, कटाव प्रभावित क्षेत्रों और संभावित जोखिम वाले स्थानों का जायजा लिया। प्रशासन का कहना है कि निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कदमों पर विचार किया जाएगा ताकि मानसून के दौरान संभावित खतरे को कम किया जा सके।

लगातार निगरानी पर जोर

ग्राम प्रधान सुचिता रौतेला ने बताया कि क्षेत्र में बनी झील और नदी का बढ़ता जलस्तर लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में बस्ती और सार्वजनिक संपत्तियों पर खतरा और बढ़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और आश्वासन दिया है कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा जरूरत पड़ने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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