RamMandir – चढ़ावा मामले की जांच तेज, एसआईटी को मिले नए सुराग
RamMandir – अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। विशेष जांच दल (एसआईटी) आरोपियों से जेल में पूछताछ कर रहा है, वहीं उनसे जुड़े संभावित ठिकानों पर भी जांच और तलाशी अभियान जारी है। जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक लगभग 80 लाख रुपये की बरामदगी का दावा किया गया है। हालांकि बरामद राशि और उससे जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

आरोपी के कमरे से मिला संदूक
जांच के दौरान एसआईटी ने आरोपी अविनाश शुक्ला के कमरे से एक संदूक बरामद किया है, जिस पर ‘रामराज्य कोष’ लिखा हुआ बताया जा रहा है। संदूक पर एक डिजिटल भुगतान के लिए QR कोड भी लगा मिला। इस बरामदगी से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस ने इस सामग्री को जांच का हिस्सा बनाया है और उससे जुड़े तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने साझा की जानकारी
श्याम साधनालय की योगाचार्य सीमा तिवारी ने बताया कि अविनाश शुक्ला पिछले करीब डेढ़ वर्ष से अयोध्या में रह रहे थे और मंदिर से संबंधित गतिविधियों में जुड़े हुए थे। उनके अनुसार, अविनाश का परिचय योग गुरु डॉ. चैतन्य और उनके भाई अभिषेक के माध्यम से हुआ था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां उपलब्ध जानकारियों का परीक्षण कर रही हैं।
प्रत्यक्षदर्शी ने बताई घटनाक्रम की जानकारी
मामले से जुड़े एक सेवादार सुंदरलाल ने दावा किया कि 5 जून को पुलिस कुछ लोगों के साथ अविनाश के किराये के मकान पर पहुंची थी। उनके अनुसार, वहां से एक बैग बरामद किया गया, जिसमें नकदी होने की बात कही गई। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्हें कमरे से बाहर कर दिया गया और पुलिस आवश्यक कार्रवाई करते हुए आरोपी को अपने साथ ले गई। पुलिस ने इस संबंध में अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
जेल में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई
चढ़ावा मामले के सभी आठ आरोपी फिलहाल जिला कारागार में न्यायिक हिरासत में हैं। सूत्रों के अनुसार, जेल के भीतर आरोपियों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी होने की चर्चा है, हालांकि जेल प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है। सुरक्षा के मद्देनजर सभी आरोपियों को कड़ी निगरानी में रखा गया है और प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि वे एक-दूसरे के सीधे संपर्क में न आ सकें।
मुलाकात और जांच प्रक्रिया पर नजर
जेल प्रशासन के अनुसार, नियमों के तहत विचाराधीन बंदियों से सप्ताह में तीन बार मुलाकात की अनुमति होती है, लेकिन इस मामले में अब तक आरोपियों से उनके परिजनों की सीमित मुलाकात ही दर्ज की गई है। अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों ने फोन पर बातचीत की सुविधा का भी अब तक उपयोग नहीं किया है। दूसरी ओर एसआईटी अपनी जांच जारी रखे हुए है और सभी उपलब्ध साक्ष्यों, बरामद सामग्री तथा संबंधित बयानों का परीक्षण कर रही है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।