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Remittance – पश्चिम एशिया तनाव के बीच भारत को रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा प्राप्त

Remittance – पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच टकराव की आशंकाओं के बावजूद भारत को विदेशों में रह रहे भारतीयों से आने वाली धनराशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल महीने में प्रवासी भारतीयों ने करीब 16 अरब अमेरिकी डॉलर भारत भेजे। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में काफी अधिक है। इससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय प्रवासी अपने परिवारों और देश की आर्थिक गतिविधियों का लगातार सहयोग कर रहे हैं।

अप्रैल में पिछले वर्ष की तुलना में बड़ा उछाल

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2025 में भारत को विदेशों से 9.4 अरब अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए थे, जबकि अप्रैल 2026 में यह बढ़कर 16 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही थी कि खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीयों से आने वाले धन पर असर पड़ सकता है। हालांकि उपलब्ध आंकड़े इस अनुमान के विपरीत रहे और विदेशी मुद्रा प्राप्ति मजबूत बनी रही। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में भारतीय कामगारों की स्थिर मौजूदगी और नियमित आय ने इस प्रवाह को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पूरे वित्त वर्ष में दर्ज हुआ नया रिकॉर्ड

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत को प्रवासी भारतीयों से कुल 155.1 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि प्राप्त हुई। इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 135.4 अरब अमेरिकी डॉलर था। इस प्रकार एक वर्ष में लगभग 14.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके परिणामस्वरूप सकल घरेलू उत्पाद में प्रवासी प्रेषण का योगदान भी बढ़ा है। वर्ष 2024-25 में जहां इसका हिस्सा 3.6 प्रतिशत था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 4 प्रतिशत तक पहुंच गया।

कठिन समय में परिवारों का सहारा बनते हैं प्रवासी

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय केवल आर्थिक कारणों से ही धन नहीं भेजते, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियां भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब भारत किसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति या आर्थिक दबाव का सामना करता है, तब प्रवासी भारतीय अक्सर अपने परिवारों की सहायता के लिए अधिक धन भेजते हैं। इस प्रवृत्ति को लंबे समय से आर्थिक अध्ययनों में भी रेखांकित किया गया है। कोविड-19 महामारी जैसे संकट के दौरान भी इसी प्रकार धन प्रेषण में बढ़ोतरी देखने को मिली थी।

रोजगार की स्थिरता से बना रहता है धन का प्रवाह

विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशों से भारत आने वाली धनराशि का सीधा संबंध प्रवासी भारतीयों की रोजगार स्थिति और आय से होता है। यह प्रवाह शेयर बाजार, निवेशकों की धारणा या अल्पकालिक वित्तीय उतार-चढ़ाव से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होता है। नियमित रोजगार और पारिवारिक आवश्यकताओं के कारण अधिकांश प्रवासी भारतीय लगातार धन भेजते रहते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारत को मिलने वाले प्रवासी प्रेषण में मजबूती बनी हुई है, जो देश की विदेशी मुद्रा स्थिति और अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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