FireSafety – लखनऊ अग्निकांड के बाद भवन सुरक्षा में बड़ी लापरवाही उजागर
FireSafety – लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड की जांच के दौरान भवन सुरक्षा से जुड़ी गंभीर चूकें सामने आई हैं। प्रारंभिक पड़ताल में पता चला है कि जिस चार मंजिला इमारत में आग लगी थी, वहां लंबे समय से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं, लेकिन भवन का आवश्यक विद्युत सुरक्षा परीक्षण नहीं कराया गया था। अधिकारियों का मानना है कि यह लापरवाही हादसे के संभावित कारणों में से एक हो सकती है।

जांच में सामने आए तथ्यों ने एक बार फिर व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
विद्युत ऑडिट नहीं कराने पर उठे सवाल
अग्निशमन विभाग के मानकों के अनुसार, व्यावसायिक भवनों और बहुमंजिला परिसरों में नियमित अंतराल पर बिजली व्यवस्था का परीक्षण कराया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि विद्युत ऑडिट से वायरिंग, लोड क्षमता और अन्य तकनीकी खामियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार, संबंधित भवन में वर्षों से विभिन्न गतिविधियां संचालित हो रही थीं, लेकिन बिजली प्रणाली की जांच और ऑडिट नहीं कराया गया। इससे संभावित जोखिमों की पहचान नहीं हो सकी और सुरक्षा संबंधी कमियां लंबे समय तक अनदेखी रह गईं।
बढ़ते विद्युत भार से बढ़ता है खतरा
विशेषज्ञ बताते हैं कि पुराने भवनों में समय के साथ बिजली की खपत बढ़ जाती है, जबकि मूल वायरिंग उसी क्षमता के अनुसार बनी होती है जो निर्माण के समय आवश्यक थी। लगातार बढ़ते उपकरणों और बिजली के उपयोग से तारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
यदि समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण न कराया जाए तो ओवरलोडिंग, शॉर्ट सर्किट और अन्य विद्युत समस्याएं गंभीर हादसों का कारण बन सकती हैं। इसी वजह से नियमित ऑडिट को सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
व्यावसायिक परिसरों में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था
अग्निशमन अधिकारियों का कहना है कि केवल विद्युत सुरक्षा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भवनों में आग से बचाव की अन्य व्यवस्थाएं भी अनिवार्य रूप से मौजूद होनी चाहिए। विशेष रूप से मध्यम और ऊंची इमारतों में अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त क्षमता वाले जल टैंक, स्प्रिंकलर सिस्टम, हाइड्रेंट और फायर एक्सटिंग्यूशर जैसी व्यवस्थाएं किसी भी आपात स्थिति में नुकसान को कम करने में मदद करती हैं। इन उपकरणों का नियमित परीक्षण और रखरखाव भी उतना ही जरूरी है।
आपातकालीन निकास की व्यवस्था जरूरी
आग लगने की स्थिति में सुरक्षित निकासी सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यावसायिक भवन में मुख्य प्रवेश मार्ग के अलावा अलग से आपातकालीन निकास मार्ग होना चाहिए।
अक्सर आग लगने के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने से लिफ्ट काम करना बंद कर देती है। ऐसे में सीढ़ियां और आपातकालीन रास्ते ही लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रमुख माध्यम बनते हैं। इसलिए भवन निर्माण और संचालन के दौरान इन व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
धुआं नियंत्रण और वेंटिलेशन की भूमिका
आग की घटनाओं में कई बार धुआं आग से भी अधिक खतरनाक साबित होता है। इसी कारण विशेषज्ञ भवनों में स्मोक मैनेजमेंट सिस्टम और उचित वेंटिलेशन व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर देते हैं।
यदि धुएं को नियंत्रित करने की पर्याप्त व्यवस्था हो तो लोगों को सुरक्षित बाहर निकलने के लिए अधिक समय मिल सकता है। इससे बचाव कार्यों को भी प्रभावी ढंग से अंजाम दिया जा सकता है।
सुरक्षा नियमों के पालन पर जोर
अधिकारियों ने कहा है कि हालिया घटना के बाद शहर के अन्य व्यावसायिक भवनों और संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जा रही है। साथ ही भवन मालिकों और संस्थान संचालकों से सभी आवश्यक मानकों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण, विद्युत ऑडिट और अग्नि सुरक्षा उपायों का सख्ती से पालन करके ऐसे हादसों की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है।