BuybackRules – सेबी ने ओपन मार्केट शेयर पुनर्खरीद को फिर दी मंजूरी
BuybackRules – भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पूंजी बाजार से जुड़ा एक अहम निर्णय लेते हुए कंपनियों को खुले बाजार के माध्यम से शेयर बायबैक करने की अनुमति फिर से देने का फैसला किया है। नियामक की बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिली, जिसके बाद नई व्यवस्था 1 अगस्त से लागू होगी। इस कदम से कंपनियों को अपने शेयरों की पुनर्खरीद के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होगा, जबकि निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए नए प्रावधान भी जोड़े गए हैं।

बायबैक के लिए फिर खुला ओपन मार्केट विकल्प
अब तक कंपनियां मुख्य रूप से टेंडर ऑफर, ऑड-लॉट बायबैक और अन्य निर्धारित प्रक्रियाओं के जरिए ही शेयर पुनर्खरीद कर सकती थीं। कुछ समय पहले ओपन मार्केट बायबैक व्यवस्था को बंद कर दिया गया था क्योंकि इसमें पारदर्शिता और सभी निवेशकों की समान भागीदारी को लेकर सवाल उठाए गए थे।
सेबी का मानना है कि नए ढांचे के साथ इस व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनाया जा सकता है। इससे कंपनियों को अपनी जरूरत और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बायबैक प्रक्रिया संचालित करने में सुविधा मिलेगी।
60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत कंपनियों को ओपन मार्केट बायबैक निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करना होगा। सेबी ने इसके लिए अधिकतम 60 दिनों की अवधि तय की है।
खुले बाजार के जरिए बायबैक में कंपनियां सीधे शेयर बाजार से अपने शेयर खरीद सकती हैं। इससे उन्हें खरीदारी का समय और गति तय करने में अधिक लचीलापन मिलता है। हालांकि इस मॉडल को लेकर पहले यह चिंता भी जताई जाती रही है कि सभी शेयरधारकों को समान अवसर नहीं मिल पाता और बाजार कीमतों पर प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से नियामक ने समय सीमा और निगरानी से जुड़े प्रावधानों को शामिल किया है।
कंपनियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है बायबैक
शेयर बायबैक को अक्सर कंपनियां अपनी अतिरिक्त नकदी का उपयोग करने और निवेशकों को मूल्य लौटाने के एक माध्यम के रूप में अपनाती हैं। इसके अलावा इससे प्रति शेयर आय (EPS) में सुधार हो सकता है और बाजार में कंपनी के भविष्य को लेकर सकारात्मक संकेत भी जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ कंपनियां एकमुश्त टेंडर ऑफर की बजाय चरणबद्ध तरीके से शेयर खरीदना पसंद करती हैं। ऐसे मामलों में ओपन मार्केट रूट अधिक व्यावहारिक माना जाता है। नई मंजूरी से ऐसी कंपनियों को फिर से यह विकल्प उपलब्ध हो जाएगा।
कमोडिटी ETF के लिए नया ट्रेडिंग ढांचा
बोर्ड बैठक में सेबी ने सोना और चांदी आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) के लिए भी नई ट्रेडिंग व्यवस्था को मंजूरी दी। यह प्रणाली 1 सितंबर से लागू होगी और इसका उद्देश्य मूल्य निर्धारण को अधिक सटीक बनाना तथा निवेशकों के लिए पारदर्शिता बढ़ाना है।
नियामक के अनुसार, नई व्यवस्था से ETF की कीमतें उनके वास्तविक आधारभूत परिसंपत्तियों के मूल्य के अधिक करीब रहेंगी। इससे घरेलू बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों को वैश्विक कीमतों के अनुरूप बेहतर मूल्य संकेत मिल सकेंगे।
प्री-ओपन ऑक्शन से शुरू होगा कारोबार
नए नियमों के तहत सोना और चांदी आधारित ETF में प्रत्येक ट्रेडिंग सत्र की शुरुआत प्री-ओपन कॉल ऑक्शन प्रक्रिया से होगी। इसके साथ ही इन उत्पादों पर डायनामिक प्राइस बैंड लागू किए जाएंगे।
इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में रातभर हुए उतार-चढ़ाव को भारतीय बाजार में जल्दी और प्रभावी तरीके से प्रतिबिंबित करना है। सेबी का मानना है कि इससे मूल्य खोज प्रक्रिया बेहतर होगी और निवेशकों को अधिक पारदर्शी तथा निष्पक्ष ट्रेडिंग वातावरण मिलेगा।
इन फैसलों को बाजार में दक्षता बढ़ाने और निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।