उत्तराखण्ड

Hydropower – टिहरी झील का जलस्तर घटा, प्रभावित हुए बिजली उत्पादन

Hydropower – उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी और अपेक्षाकृत कम वर्षा का असर अब टिहरी बांध परियोजना पर भी दिखाई देने लगा है। टिहरी झील का जलस्तर लगातार घटने से जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की सक्रियता में देरी और नदियों में कम जलप्रवाह के कारण जलाशय में पानी का स्तर सामान्य से काफी नीचे पहुंच गया है।

जलस्तर में आई इस गिरावट का सीधा असर बिजली उत्पादन क्षमता पर पड़ा है। साथ ही सिंचाई और पेयजल आपूर्ति की आवश्यकताओं को पूरा करना भी चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

न्यूनतम स्तर के करीब पहुंचा जलाशय

अधिकारियों के अनुसार, टिहरी झील का जलस्तर इन दिनों अपने सामान्य अधिकतम स्तर की तुलना में काफी नीचे दर्ज किया गया है। जलाशय में पानी की मात्रा कम होने से बांध की परिचालन क्षमता प्रभावित हुई है। गर्मी के मौसम में यह स्थिति असामान्य नहीं मानी जाती, लेकिन इस बार कम बारिश के कारण प्रभाव अधिक दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलस्तर में गिरावट मुख्य रूप से कैचमेंट क्षेत्रों में कम वर्षा और नदी प्रवाह में कमी की वजह से हुई है।

बिजली उत्पादन पर पड़ा असर

जल उपलब्धता कम होने के कारण टिहरी और कोटेश्वर जलविद्युत परियोजनाओं से होने वाला बिजली उत्पादन घट गया है। सामान्य परिस्थितियों में जहां अधिक मात्रा में बिजली का उत्पादन संभव होता है, वहीं वर्तमान स्थिति में उत्पादन क्षमता सीमित हो गई है।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, उपलब्ध जल संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए टरबाइनों के संचालन में भी आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं।

नदियों से कम पहुंच रहा पानी

भागीरथी, भिलंगना और अन्य सहायक नदियों से जलाशय में पहुंचने वाले पानी की मात्रा इस समय अपेक्षाकृत कम बनी हुई है। जल प्रवाह घटने के कारण झील में नए पानी का संग्रह सीमित हो रहा है। यही कारण है कि जलस्तर में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिल रहा।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की अच्छी वर्षा ही इस स्थिति में बड़ा बदलाव ला सकती है।

सिंचाई और पेयजल की जरूरतें भी अहम

टिहरी बांध केवल बिजली उत्पादन का स्रोत नहीं है, बल्कि कई राज्यों के लिए सिंचाई और पेयजल आपूर्ति का भी महत्वपूर्ण आधार है। वर्तमान परिस्थितियों में जल संसाधनों का प्रबंधन और अधिक सावधानी के साथ किया जा रहा है ताकि विभिन्न आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के महीनों में जल प्रबंधन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, क्योंकि इसी अवधि में पानी की मांग अधिक रहती है।

कई राज्यों को मिलता है लाभ

टिहरी परियोजना से उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्रों को भी लाभ मिलता है। यही वजह है कि जलाशय के स्तर में बदलाव का प्रभाव व्यापक स्तर पर महसूस किया जाता है।

ऊर्जा और जल संसाधन विशेषज्ञ लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं ताकि आवश्यकतानुसार परिचालन रणनीति में बदलाव किया जा सके।

मानसून से जुड़ी हैं उम्मीदें

परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मानसून सक्रिय होने के बाद जलाशय में पानी का स्तर बढ़ने की संभावना रहती है। सामान्य वर्षा होने पर झील में पर्याप्त जल संग्रह होता है और बिजली उत्पादन भी बढ़ जाता है।

फिलहाल सभी की निगाहें मानसून की प्रगति पर टिकी हैं। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे जलस्तर में सुधार होगा और बिजली उत्पादन फिर से सामान्य स्तर की ओर लौट सकेगा।

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