SoilTesting – बिहार के सैकड़ों सरकारी स्कूलों में स्थापित होंगी मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं
SoilTesting – बिहार सरकार ने कृषि शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के सरकारी विद्यालयों में मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं का दायरा बढ़ाने की योजना बनाई गई है। कृषि विभाग के अनुसार आने वाले वित्तीय वर्ष में 629 पीएम श्री और राजकीय विद्यालयों में मिनी मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान से जोड़ना और किसानों के बीच मिट्टी की गुणवत्ता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

यह जानकारी कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कृषि भवन में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान दी। बैठक में मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना और मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत चल रही विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया।
पहले चरण में 160 विद्यालयों में शुरू हुई पहल
कृषि मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान स्कूल सॉयल हेल्थ प्रोग्राम के तहत राज्य के 160 विद्यालयों में मिनी मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इन प्रयोगशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को मिट्टी की जांच, नमूना संग्रहण और कृषि से जुड़ी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।
सरकार का मानना है कि विद्यालय स्तर पर इस तरह की सुविधाएं उपलब्ध होने से छात्रों में अनुसंधान, प्रयोग और पर्यावरणीय समझ विकसित होगी। साथ ही कृषि क्षेत्र के प्रति उनकी रुचि भी बढ़ेगी।
विद्यार्थियों को मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
नई योजना के तहत कक्षा 7, 8, 9 और 11 के छात्र-छात्राओं को सीधे मृदा परीक्षण गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। विद्यार्थी मिट्टी के नमूने एकत्र करने, उनकी जांच करने और परिणामों को समझने जैसी प्रक्रियाओं में भाग लेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी दक्षता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित होगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान के आधुनिक पहलुओं को समझने का अवसर भी मिलेगा।
केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे खर्च
योजना के वित्तीय ढांचे की जानकारी देते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय में प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए लगभग एक लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार उपलब्ध कराएगी।
इसके अलावा प्रत्येक विद्यालय को मिट्टी के 50 नमूनों के परीक्षण का लक्ष्य दिया गया है। जांच के बाद संबंधित किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों को अपनी भूमि की गुणवत्ता के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने में मदद मिलेगी और खेती की लागत कम करने में भी सहायता मिलेगी।
किसानों और स्कूलों के बीच बनेगा समन्वय
सरकार का मानना है कि यह कार्यक्रम विद्यालयों और किसानों के बीच एक उपयोगी साझेदारी विकसित करेगा। छात्र जहां प्रयोगात्मक शिक्षा प्राप्त करेंगे, वहीं किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी की जांच और खेती संबंधी सलाह मिल सकेगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग और बेहतर उत्पादन के लिए मृदा परीक्षण बेहद जरूरी है। इस दिशा में स्कूलों की भागीदारी कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
ड्रैगन फ्रूट योजना की भी हुई समीक्षा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत संचालित ड्रैगन फ्रूट विकास योजना की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि पिछले तीन वर्षों के लिए इस योजना को तीन करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत राशि में से 13.62 लाख रुपये के व्यय को मंजूरी प्रदान की जा चुकी है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी योजनाओं को तय समय सीमा के भीतर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए ताकि किसानों और विद्यार्थियों को अधिकतम लाभ मिल सके।