Milk Product Purity Campaign: क्या आपकी थाली में भी परोसा जा रहा है जहर, दूध, पनीर और खोया की शुद्धता पर FSSAI ने किया बड़ा प्रहार
Milk Product Purity Campaign: देश के करोड़ों परिवारों की सुबह की शुरुआत दूध से होती है, लेकिन हाल के दिनों में इस सफेद अमृत में जहर घोलने वाले मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हो गए हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने सभी राज्यों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अब (Food Safety Regulations) का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। दूध, पनीर और खोया जैसे आवश्यक दुग्ध उत्पादों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष जांच अभियान शुरू किया जा रहा है, ताकि हर भारतीय की सेहत सुरक्षित रहे।

मासूम सेहत और मुनाफे की अंधी दौड़
प्राधिकरण के पास पिछले कुछ महीनों में मिलावट और गलत लेबलिंग की शिकायतों का अंबार लग गया था। कई जगहों पर शुद्ध पनीर के नाम पर नकली एनालॉग उत्पाद बेचे जा रहे थे, जो सीधे तौर पर (Public Health Risk) को बढ़ा रहे हैं। एफएसएसएआई ने चेतावनी दी है कि नकली उत्पादों को शुद्ध बताकर बेचना न केवल एक नैतिक अपराध है, बल्कि यह कानूनन भी दंडनीय है। इस बार सरकार का रुख इतना कड़ा है कि दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
खेत से लेकर दुकान तक हर जगह होगी छापेमारी
यह विशेष अभियान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी पहुंच जमीनी स्तर तक होगी। राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग और एफएसएसएआई की टीमें संयुक्त रूप से (Supply Chain Monitoring) के तहत हर उस जगह दबिश देंगी, जहां दुग्ध उत्पादों का उत्पादन, भंडारण या बिक्री हो रही है। इस जांच के दायरे में न केवल बड़े ब्रांड्स और लाइसेंस प्राप्त कारोबारी आएंगे, बल्कि उन अवैध इकाइयों पर भी नजर रखी जाएगी जो गुपचुप तरीके से मिलावटी खोया और पनीर बाजार में खपा रहे हैं।
बिना लाइसेंस कारोबार करने वालों पर गिरेगी गाज
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे हर प्रतिष्ठान के वैध दस्तावेजों की गहनता से जांच करें। अगर किसी इकाई के पास वैध (FSSAI Licensing) नहीं पाया गया, तो उसे तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि बिना पंजीकरण के चल रही इकाइयां ही अक्सर मिलावट का मुख्य केंद्र होती हैं, क्योंकि उन पर किसी का नियंत्रण नहीं होता। अब फर्जी दस्तावेजों या बिना लाइसेंस के कारोबार करने वालों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मिलावट की जड़ तक पहुंचने की नई रणनीति
अक्सर देखा जाता है कि छोटे दुकानदारों पर तो कार्रवाई हो जाती है, लेकिन बड़े सप्लायर बच निकलते हैं। इस बार एफएसएसएआई ने (Traceability Investigation) के जरिए मिलावट के वास्तविक स्रोत तक पहुंचने की योजना बनाई है। संदिग्ध नमूनों के आधार पर पूरी चेन का पता लगाया जाएगा और जहां भी असुरक्षित खाद्य पदार्थ मिलेंगे, उन्हें तुरंत जब्त कर लिया जाएगा। दोषी पाए जाने पर लाइसेंस रद्द करने के साथ-साथ उत्पाद को बाजार से वापस मंगाकर नष्ट करने का प्रावधान भी लागू किया गया है।
उपभोक्ताओं के विश्वास को बहाल करने की कोशिश
दूध और पनीर जैसे उत्पादों में मिलावट ने आम आदमी के मन में एक गहरा डर और अविश्वास पैदा कर दिया है। प्राधिकरण का यह अभियान (Consumer Trust Building) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राज्यों को कड़ाई से निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में आए बिना अपना काम करें। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में केवल वही उत्पाद बिकें जो कड़े स्वास्थ्य मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हों।
मिलावटमुक्त भारत के संकल्प की ओर एक ठोस कदम
कड़ाके की ठंड और त्योहारों के आगामी सीजन को देखते हुए दुग्ध उत्पादों की मांग बढ़ना तय है, और यही वह समय है जब मिलावटखोर सबसे ज्यादा सक्रिय होते हैं। प्राधिकरण की यह सक्रियता (Market Surveillance Strategy) का हिस्सा है ताकि मांग और आपूर्ति के खेल में शुद्धता की बलि न चढ़े। एफएसएसएआई ने साफ कर दिया है कि मिलावट करने वालों के लिए देश में कोई जगह नहीं है और उनकी एक गलती उन्हें भारी आर्थिक दंड और कड़ी कानूनी सजा की ओर ले जा सकती है।



