MedicalScam – केजीएमयू दवा खरीद मामले में जांच रिपोर्ट से हुए बड़े खुलासे
MedicalScam – लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में दवा खरीद से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता मामले की जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। पांच सदस्यीय समिति द्वारा तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि कुछ मरीजों के नाम पर महंगी दवाओं की खरीद और वितरण में अनियमितताएं हुईं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार मामले में करोड़ों रुपये के वित्तीय नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

जांच रिपोर्ट में विशेष रूप से उन मामलों का उल्लेख किया गया है, जिनमें सामान्य यूरोलॉजी संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों के रिकॉर्ड का उपयोग कर अत्यधिक महंगी दवाओं की खरीद दिखाई गई। रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने आगे की कार्रवाई तेज कर दी है।
मरीजों के रिकॉर्ड के दुरुपयोग के आरोप
समिति की जांच में यह बात सामने आई है कि कुछ मरीजों के यूएचआईडी नंबर और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़े दस्तावेजों का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि इन रिकॉर्ड के आधार पर अस्पताल के स्टोर से महंगी दवाएं जारी कराई गईं और उनके भुगतान की प्रक्रिया भी पूरी की गई।
जांच अधिकारियों का मानना है कि संबंधित दस्तावेजों का उपयोग वास्तविक उपचार के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया हो सकता है। इस पहलू की विस्तृत पड़ताल जारी है।
महंगी दवाओं की खरीद पर उठे सवाल
रिपोर्ट में ऐसे कई मामलों का उल्लेख है जहां गुर्दे, प्रोस्टेट या पथरी जैसी बीमारियों से जुड़े मरीजों के नाम पर कैंसर उपचार में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाएं जारी की गईं। दस्तावेजों में इन दवाओं के उपयोग का रिकॉर्ड दर्ज है, लेकिन जांच के दौरान कई तथ्यों ने संदेह पैदा किया है।
जांच समिति अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दवाओं की आपूर्ति, वितरण और उपयोग की पूरी प्रक्रिया में कहां-कहां अनियमितताएं हुईं और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
मृत मरीज के नाम पर भी जारी रहीं दवाएं
जांच के दौरान एक ऐसा मामला भी सामने आया है जिसने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, एक महिला मरीज की मृत्यु के बाद भी उसके नाम पर दवाओं की मांग और आपूर्ति का रिकॉर्ड दर्ज पाया गया।
इस मामले की अलग से जांच की जा रही है। अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि संबंधित दस्तावेजों का उपयोग किस स्तर पर और किस उद्देश्य से किया गया। मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है।
सात विभागों का होगा विस्तृत ऑडिट
प्रकरण सामने आने के बाद केजीएमयू प्रशासन ने व्यापक स्तर पर ऑडिट कराने का फैसला लिया है। संस्थान के उन सभी विभागों की जांच की जाएगी जहां कैंसर रोगियों का उपचार और कीमोथेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि महंगी दवाओं की खरीद, वितरण और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की विस्तार से जांच की जाए। पांच हजार रुपये से अधिक मूल्य वाली दवाओं के बिल, वाउचर और रिकॉर्ड को विशेष रूप से खंगाला जाएगा।
प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत उपचार प्राप्त करने वाले मरीजों के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में लाए जाएंगे। जांच पूरी होने तक संबंधित विभागों में निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया जारी रहेगी।
संस्थान के प्रवक्ता ने बताया कि मामले की गहन जांच की जा रही है और जिम्मेदारी तय होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रारंभिक स्तर पर कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कदम उठाए जा चुके हैं, जबकि आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।