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PMSVANidhi – छह साल में लाखों रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं तक पहुंची योजना

PMSVANidhi – प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के छह वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके प्रभाव और उपलब्धियों को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि यह पहल छोटे कारोबारियों और रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है। कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में शुरू की गई इस योजना ने लाखों लोगों को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने में मदद की है।

प्रधानमंत्री ने लाभार्थियों को दी बधाई

सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि योजना ने देशभर के असंख्य छोटे विक्रेताओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है। उनके अनुसार, यह केवल ऋण उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का एक माध्यम भी है। उन्होंने लाभार्थियों की मेहनत और उद्यमशीलता की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

वर्ष 2030 तक बढ़ाई गई योजना

केंद्र सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना की अवधि को वर्ष 2030 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए 7,332 करोड़ रुपये का विस्तारित बजटीय प्रावधान किया गया है। साथ ही ऋण सीमा में भी बढ़ोतरी की गई है ताकि अधिक से अधिक छोटे कारोबारी इसका लाभ उठा सकें। सरकार का लक्ष्य 1.15 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच बनाना है और उन्हें आधुनिक वित्तीय सुविधाओं से जोड़ना है।

करोड़ों रुपये के ऋण से कारोबार को मिला सहारा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 75 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को 112 लाख से ज्यादा ऋण वितरित किए जा चुके हैं। इन ऋणों की कुल राशि 17,800 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। योजना के माध्यम से छोटे व्यापारियों को अपने कारोबार को फिर से शुरू करने, सामान खरीदने और आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद मिली है।

ब्याज सब्सिडी और प्रोत्साहन का भी लाभ

योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को ब्याज सब्सिडी और कैशबैक प्रोत्साहन के रूप में करीब 800 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे समय पर ऋण चुकाने की आदत को बढ़ावा मिला है और लाभार्थियों में वित्तीय अनुशासन भी मजबूत हुआ है। डिजिटल भुगतान को अपनाने वाले विक्रेताओं को अतिरिक्त लाभ मिलने से नकदी रहित लेनदेन को भी प्रोत्साहन मिला है।

पहली बार संस्थागत ऋण तक पहुंच

सरकारी जानकारी के अनुसार, योजना से जुड़े लगभग 95 प्रतिशत लोगों ने पहली बार औपचारिक बैंकिंग और ऋण प्रणाली तक पहुंच बनाई। यह उन छोटे व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, जो पहले पारंपरिक वित्तीय संस्थानों से दूर थे। वहीं करीब 30 प्रतिशत लाभार्थियों ने शुरुआती ऋण के बाद अन्य वित्तीय सहायता भी प्राप्त की है।

डिजिटल लेनदेन में दर्ज हुई उल्लेखनीय बढ़ोतरी

योजना से जुड़े विक्रेताओं ने अब तक 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 9 लाख करोड़ रुपये बताया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि छोटे कारोबारी तेजी से डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अपना रहे हैं। सरकार का मानना है कि इससे देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

महिलाओं और वंचित वर्गों की बढ़ी भागीदारी

योजना के लाभार्थियों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 46 प्रतिशत है। सरकार के अनुसार, इससे महिलाओं को आर्थिक स्थिरता, आत्मनिर्भरता और रोजगार के नए अवसर प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लोग भी इस योजना से जुड़े हैं, जिससे उन्हें वित्तीय समावेशन का लाभ मिला है।

प्रशिक्षण के जरिए बढ़ाई जा रही जागरूकता

सरकार ने बताया कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा लगभग छह लाख स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है। इसका उद्देश्य छोटे खाद्य कारोबारियों को बेहतर सेवाएं प्रदान करने और ग्राहकों का विश्वास बढ़ाने में मदद करना है।

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