CNG Price Hike – बढ़ती गैस कीमतों से आम लोगों का बिगड़ने लगा बजट
CNG Price Hike – देशभर में ईंधन की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोल और डीजल की ऊंची दरों के बीच अब सीएनजी के दामों में भी लगातार इजाफा हो रहा है। मंगलवार को दिल्ली में सीएनजी की कीमत में 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद राजधानी में नई दर 83.09 रुपये प्रति किलो हो गई है। इससे पहले यहां सीएनजी 81.09 रुपये प्रति किलो बिक रही थी। लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब रोजमर्रा के खर्च और सार्वजनिक परिवहन दोनों पर साफ दिखाई देने लगा है।

कई शहरों में ईंधन की कीमतें ऊंचे स्तर पर
देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पहले से ही ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुका है। कोलकाता और हैदराबाद जैसे शहरों में भी पेट्रोल की कीमतें 113 रुपये से ऊपर बनी हुई हैं।
चेन्नई, पटना, नोएडा और बेंगलुरु समेत कई शहरों में भी वाहन चालकों को महंगे ईंधन का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ती लागत का असर निजी वाहन उपयोग करने वाले लोगों के साथ-साथ परिवहन क्षेत्र पर भी पड़ रहा है।
12 दिनों में चौथी बार बढ़े सीएनजी के दाम
मई महीने में सीएनजी की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिला है। बीते 12 दिनों के भीतर चार बार कीमतें बढ़ाई जा चुकी हैं। 15 मई को पहली बार 2 रुपये प्रति किलो की वृद्धि हुई थी। इसके बाद 17 मई और 23 मई को भी दाम बढ़ाए गए। अब 26 मई की नई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में सीएनजी 83.09 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
लगातार हो रही बढ़ोतरी से ऑटो, टैक्सी और सीएनजी कार चलाने वाले लोगों का मासिक खर्च काफी बढ़ गया है। कई वाहन चालकों का कहना है कि पहले सीएनजी को सस्ता विकल्प माना जाता था, लेकिन अब इसका फायदा कम होता जा रहा है।
सार्वजनिक परिवहन पर दिख सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आने वाले दिनों में सार्वजनिक परिवहन किराए पर भी पड़ सकता है। दिल्ली, मुंबई और अन्य बड़े शहरों में बड़ी संख्या में ऑटो, टैक्सी और बसें सीएनजी से संचालित होती हैं। ऐसे में ईंधन महंगा होने से परिवहन सेवाओं की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है।
इसके अलावा माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से बाजार में जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बन सकता है। फल, सब्जियां और रोजमर्रा के उपयोग की अन्य चीजों की सप्लाई सड़क मार्ग से होती है, इसलिए परिवहन खर्च बढ़ने का असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
वैश्विक तनाव का ऊर्जा बाजार पर असर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव को भी ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी की बड़ी वजह माना जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। इसका असर भारत समेत कई देशों के ईंधन बाजार पर दिखाई दे रहा है।
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ने के बाद घरेलू स्तर पर भी पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में बदलाव तेज हुए हैं। कई राज्यों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी हुई तेज
सीएनजी की बढ़ती कीमतों को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने लगातार हो रही बढ़ोतरी को आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बताया है। पार्टी का कहना है कि बढ़ती महंगाई से मध्यम वर्ग और रोज कमाने-खाने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
वहीं, चेन्नई के कुछ ऑटो चालकों ने कहा कि यदि ईंधन महंगा होता है तो किराया दरों में भी संतुलित बदलाव होना चाहिए। उनका मानना है कि बढ़ती लागत के बीच पुराने किराए पर काम करना मुश्किल होता जा रहा है।