उत्तराखण्ड

BadrinathTemple – हाईकोर्ट ने खारिज की निलंबित कर्मचारी की याचिका

BadrinathTemple – उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने श्री बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई जाने वाली थाली भेंट की गणना के दौरान कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को राहत देने से इनकार कर दिया है। कर्मचारी ने अपने निलंबन आदेश, दर्ज एफआईआर को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि संबंधित कर्मचारी की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिसके बाद न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने गिरफ्तारी के बाद याचिका को माना अप्रासंगिक

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जब याचिकाकर्ता को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है, तब गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसी आधार पर न्यायालय ने याचिका को निरस्त कर दिया और मामले में आगे कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

सोशल मीडिया पर सामने आई थी शिकायत

अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति को 2 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया के माध्यम से थाली भेंट की गणना में कथित वित्तीय गड़बड़ी की जानकारी मिली थी। शिकायत सामने आने के बाद मंदिर समिति ने मामले का संज्ञान लेते हुए प्रारंभिक जांच कराने का निर्णय लिया। इसके लिए समिति की ओर से एक विभागीय जांच समिति गठित की गई थी।

प्रारंभिक जांच में सामने आए आरोप

जांच समिति की शुरुआती रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि मंदिर समिति के कर्मचारी प्रमोद नौटियाल ने निर्धारित गणना स्थल से कथित रूप से धनराशि उठाई थी। रिपोर्ट में घटना का समय सुबह करीब नौ बजे से साढ़े नौ बजे के बीच बताया गया। जांच के प्रारंभिक निष्कर्षों के आधार पर मंदिर समिति ने संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी किया।

शिकायत के आधार पर दर्ज हुआ मुकदमा

विभागीय कार्रवाई के बाद श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान ने श्री बदरीनाथ कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू की। इसके बाद पुलिस ने आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की।

जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी

मामले में पुलिस जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं। अदालत के ताजा आदेश के बाद अब प्रकरण की सुनवाई संबंधित विधिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ेगी। फिलहाल न्यायालय ने केवल याचिका को खारिज किया है, जबकि मामले के तथ्यों और आरोपों की जांच कानून के निर्धारित प्रावधानों के तहत जारी रहेगी।

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