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Heatwave – 45 डिग्री के पार तापमान से सेहत पर बढ़ा खतरा

Heatwave – देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजधानी दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर और मध्य भारत के अनेक राज्यों में तापमान लगातार 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। भारतीय मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी गर्मी से तत्काल राहत मिलने की संभावना कम बताई है। तेज धूप और लू के कारण अस्पतालों में भी गर्मी से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की गर्मी सिर्फ असुविधा नहीं पैदा करती, बल्कि शरीर के कई अहम अंगों पर गंभीर असर डाल सकती है।

बढ़ते तापमान से शरीर पर बढ़ता दबाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर सामान्य परिस्थितियों में लगभग 37 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखने की कोशिश करता है। लेकिन जब बाहरी तापमान बहुत अधिक हो जाता है, तब शरीर को खुद को ठंडा रखने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इस दौरान पसीना ज्यादा निकलता है और शरीर में पानी तथा जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से कम होने लगते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से बीमार लोग अत्यधिक गर्मी के असर के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। लंबे समय तक तेज गर्मी में रहने से शरीर में रक्त संचार का संतुलन प्रभावित होने लगता है, जिससे हृदय, मस्तिष्क, लिवर और किडनी जैसे अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

दिल की सेहत पर सबसे ज्यादा असर

विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिक तापमान के दौरान शरीर त्वचा की ओर ज्यादा रक्त भेजता है ताकि गर्मी बाहर निकल सके। इस प्रक्रिया में हृदय को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार तेज गर्मी और लंबे समय तक धूप में रहने से हार्ट रेट बढ़ सकता है, जिससे हृदय संबंधी जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि डिहाइड्रेशन की स्थिति में शरीर में सोडियम और पोटैशियम जैसे जरूरी तत्वों की कमी हो सकती है। ये तत्व दिल की सामान्य कार्यप्रणाली के लिए बेहद आवश्यक माने जाते हैं। पानी की कमी बढ़ने पर ब्लड प्रेशर असंतुलित हो सकता है और गंभीर मामलों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी स्थिति भी बन सकती है।

लिवर और मस्तिष्क भी हो सकते हैं प्रभावित

चिकित्सकीय अध्ययनों में पाया गया है कि अत्यधिक गर्मी का असर लिवर पर भी पड़ता है। लंबे समय तक हीटवेव की स्थिति में रहने पर लिवर एंजाइम्स का स्तर बढ़ सकता है, जो लिवर पर दबाव का संकेत माना जाता है। शरीर में पानी की कमी होने से रक्त संचार धीमा पड़ने लगता है, जिससे ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति प्रभावित होती है।

विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि अत्यधिक गर्मी का असर मस्तिष्क की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है। लगातार धूप और लू में रहने से चक्कर आना, थकान, भ्रम या बेहोशी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। गंभीर स्थिति में हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।

किडनी रोग का खतरा बढ़ने की आशंका

नेफ्रोलॉजिस्टों के अनुसार गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा असर किडनी पर भी देखा जाता है। अधिक पसीना आने से शरीर में पानी की मात्रा तेजी से कम होती है, जिससे किडनी तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। लगातार डिहाइड्रेशन की स्थिति में पेशाब गाढ़ा होने लगता है और शरीर में मिनरल्स जमा होने का खतरा बढ़ जाता है।

नेशनल किडनी फाउंडेशन की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि लंबे समय तक गर्म वातावरण में काम करने वाले लोगों में किडनी रोग का खतरा अपेाकृत अधिक पाया गया है। डॉक्टर लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धूप में कम निकलने और शरीर में कमजोरी महसूस होने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की सलाह दे रहे हैं।

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