EbolaVirus – अफ्रीकी देशों में बढ़ते संक्रमण पर सतर्क हुई स्वास्थ्य एजेंसियां
EbolaVirus – अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहे इबोला संक्रमण ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। कांगो और युगांडा से शुरू हुआ यह प्रकोप अब कई देशों की निगरानी सूची में शामिल हो चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्थिति को गंभीर मानते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति बताया है। इसी बीच नई दिल्ली में मई के अंत में प्रस्तावित भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन को स्थगित किए जाने के बाद भारत में भी लोगों के बीच इस बीमारी को लेकर सवाल बढ़ने लगे हैं।

संक्रमण को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता
डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में सामने आया इबोला का नया प्रकोप कुछ ही सप्ताह में तेजी से फैलता दिखा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह हाल के वर्षों के सबसे गंभीर संक्रमणों में गिना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि अब तक सैकड़ों संदिग्ध मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। अफ्रीका के कई हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव को देखते हुए जोखिम स्तर को और अधिक गंभीर माना जा रहा है।
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि कुछ क्षेत्रों में सीमित संसाधन और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सहायता में कमी के कारण हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। यही वजह है कि वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी और रोकथाम पर जोर दे रही हैं।
भारत में फिलहाल संक्रमण का कोई मामला नहीं
भारत सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि देश में अब तक इबोला संक्रमण का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि एयरपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की निगरानी जैसे एहतियाती कदम पहले से लागू हैं। हालांकि भारत-अफ्रीका मंच शिखर सम्मेलन को स्थगित किए जाने के बाद लोगों में आशंका बढ़ी थी कि कहीं यह फैसला संक्रमण के खतरे से जुड़ा तो नहीं है।
विदेश मंत्रालय ने सम्मेलन टालने के पीछे सीधे तौर पर इबोला का उल्लेख नहीं किया, लेकिन अफ्रीकी देशों में मौजूदा स्वास्थ्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फैसले अक्सर सावधानी के तौर पर लिए जाते हैं ताकि किसी भी संभावित जोखिम से बचा जा सके।
क्या फिर से मास्क पहनना जरूरी होगा?
कोविड महामारी के अनुभव के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इबोला के कारण फिर से मास्क पहनना जरूरी हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इबोला और कोरोना वायरस के फैलने का तरीका पूरी तरह अलग है। इबोला हवा के जरिए फैलने वाली बीमारी नहीं मानी जाती, इसलिए केवल मास्क पहनना इससे बचाव का प्रभावी उपाय नहीं है।
डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। ऐसे में संक्रमित व्यक्ति या उसके इस्तेमाल की वस्तुओं से दूरी बनाए रखना ज्यादा जरूरी माना जाता है। अस्पतालों और संक्रमित क्षेत्रों में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए विशेष सुरक्षा उपकरणों का उपयोग आवश्यक होता है।
बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। इबोला से बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, उल्टी, लार या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से बचना जरूरी है। संक्रमित मरीजों की देखभाल करते समय सुरक्षा मानकों का पालन करना भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और केवल आधिकारिक स्वास्थ्य एजेंसियों की जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते निगरानी, जागरूकता और सावधानी बरतने से संक्रमण के खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।