ExportFinance – पश्चिम एशिया तनाव के बीच एक्ज़िम बैंक ने तय किया नया लक्ष्य
ExportFinance – पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता के बावजूद भारतीय निर्यात-आयात बैंक ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने कर्ज पोर्टफोलियो को बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। बैंक प्रबंधन का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय निर्यातकों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए संस्थान पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रहा है। बैंक ने स्थिर मुद्रा आधार पर करीब 10 प्रतिशत ऋण वृद्धि का अनुमान रखा है।

विदेशी मुद्रा उतार-चढ़ाव का पड़ा प्रभाव
पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक की ऋण पुस्तिका में लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी। हालांकि बैंक अधिकारियों के अनुसार इस वृद्धि में विदेशी मुद्रा विनिमय दरों की अहम भूमिका रही। मुद्रा विनिमय में बदलाव से कुल आंकड़ों पर सकारात्मक असर पड़ा, जिससे वृद्धि दर ऊंची दिखाई दी। बैंक की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हर्षा बंगारी ने बताया कि बैंक के कुल कर्ज का बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा में है, जबकि बाकी ऋण रुपये में वितरित किए जाते हैं।
उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में घरेलू मुद्रा में ऋण वितरण का दायरा और बढ़ सकता है, क्योंकि भारतीय निर्यातकों की स्थानीय वित्तीय जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। बैंक का मानना है कि बदलते वैश्विक व्यापार माहौल में रुपये आधारित वित्तपोषण अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।
पश्चिम एशिया संकट पर बैंक की नजर
एक्ज़िम बैंक का कहना है कि फिलहाल पश्चिम एशिया में जारी तनाव का उसके कारोबार पर सीधा असर सीमित है। बैंक की ओर से दिए जाने वाले अधिकांश कर्ज मध्यम और लंबी अवधि के होते हैं, इसलिए अल्पकालिक भू-राजनीतिक घटनाओं का तत्काल असर नहीं पड़ता। बैंक का उस क्षेत्र में निवेश और जोखिम भी अपेक्षाकृत कम बताया गया है।
हालांकि, प्रबंधन ने यह भी स्वीकार किया कि यदि क्षेत्रीय तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो वैश्विक आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में निर्यातकों की लागत और लाभ दोनों पर दबाव बढ़ने की आशंका रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यातक कंपनियां तब घरेलू बाजार पर अधिक निर्भरता बढ़ा सकती हैं।
लैटिन अमेरिका में बढ़ रही भारतीय कंपनियों की दिलचस्पी
बैंक ने कहा कि भारतीय कंपनियां वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच नए बाजार तलाशने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। खासतौर पर लैटिन अमेरिकी देशों में भारतीय निर्यातकों की रुचि बढ़ी है। इसी रणनीति के तहत एक्ज़िम बैंक ने हाल ही में ब्राजील के साओ पाउलो शहर में अपना नया कार्यालय शुरू किया है।
बैंक का मानना है कि इस क्षेत्र में मौजूद अवसर भारतीय कंपनियों के लिए लंबे समय में फायदेमंद साबित हो सकते हैं। इससे निर्यात कारोबार को विविधता मिलेगी और कंपनियां सीमित बाजारों पर निर्भर रहने के जोखिम से भी बच सकेंगी।
बाजार से बड़े स्तर पर पूंजी जुटाने की तैयारी
निर्यात क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए बैंक ने अपनी उधारी योजना का दायरा भी बढ़ाया है। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान बैंक लगभग 99,500 करोड़ रुपये बाजार से जुटाने की तैयारी में है। यह पिछले वर्ष के मुकाबले काफी अधिक है।
बैंक प्रबंधन के अनुसार, इस योजना में विदेशी बाजारों से करीब 3.5 अरब डॉलर जुटाने की संभावना भी शामिल है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांड जारी करने की रणनीति तैयार की जा रही है। बैंक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय निर्यातकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलती रहे।