SecurityReview – पश्चिम बंगाल से शुरू हुई केंद्रीय बलों की वापसी प्रक्रिया
SecurityReview – पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की वापसी अब चरणबद्ध तरीके से शुरू कर दी गई है। हालिया सुरक्षा समीक्षा के बाद केंद्र सरकार ने राज्य से कुछ कंपनियों को हटाने का फैसला लिया है। पहले चरण में 100 कंपनियों को वापस बुला लिया गया है, जबकि शेष बलों की वापसी आगामी दिनों में अलग-अलग चरणों में की जाएगी।

चुनाव के बाद राज्य में संभावित तनाव और हिंसा की आशंका को देखते हुए बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों को तैनात रखा गया था। अब सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त समीक्षा में स्थिति सामान्य पाए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में राज्य के कई हिस्सों में हालात पहले की तुलना में शांत बताए जा रहे हैं।
गृह मंत्रालय ने राज्य प्रशासन को भेजा संदेश
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में आधिकारिक सूचना भेजी गई है। इसमें मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की चरणबद्ध वापसी की जानकारी दी गई है।
चुनाव संपन्न होने के बाद भी राज्य में बलों को बनाए रखने का फैसला पिछली घटनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया था। इससे पहले चुनाव बाद कुछ इलाकों में हिंसा और राजनीतिक टकराव की घटनाएं सामने आई थीं। इस बार ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसलिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था जारी रखी गई थी।
कई केंद्रीय बलों की कंपनियां थीं तैनात
राज्य में सुरक्षा ड्यूटी के लिए सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी की कुल 500 कंपनियां लगाई गई थीं। इनमें सबसे अधिक संख्या सीआरपीएफ और बीएसएफ की थी। इन बलों को संवेदनशील इलाकों, सीमावर्ती क्षेत्रों और चुनाव प्रभावित जिलों में तैनात किया गया था।
सुरक्षा हालात की समीक्षा में राज्य के गृह विभाग के साथ केंद्रीय एजेंसियों और खुफिया विभाग की रिपोर्ट को भी शामिल किया गया। समीक्षा में बताया गया कि फिलहाल राजनीतिक हिंसा या बड़े प्रदर्शनों की घटनाएं कम हुई हैं। सीमावर्ती इलाकों में भी सुरक्षा निगरानी को मजबूत बनाए रखा गया है।
पहले चरण में 10 हजार जवानों की वापसी
पहले चरण के तहत लगभग 100 कंपनियों को पश्चिम बंगाल से हटाया गया है। इनमें अलग-अलग केंद्रीय बलों की इकाइयां शामिल हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 15 मई से इन कंपनियों को राज्य में कानून व्यवस्था ड्यूटी से मुक्त कर दिया गया है।
हालांकि अभी भी 400 कंपनियां राज्य में मौजूद रहेंगी, ताकि जरूरत पड़ने पर सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो। केंद्र और राज्य दोनों स्तर पर स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य की समीक्षा के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग का काम तेज
इसी बीच पश्चिम बंगाल से लगती बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग परियोजना को लेकर भी गतिविधियां तेज हुई हैं। राज्य सरकार ने सीमा सुरक्षा बल को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की घोषणा की है। जानकारी के अनुसार, लगभग 450 किलोमीटर लंबे खुले सीमा क्षेत्र में फेंसिंग लगाने की तैयारी की जा रही है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया अगले कुछ सप्ताह में पूरी की जा सकती है। इसके तहत कई नए सुरक्षा ढांचे और बटालियन मुख्यालय स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है। सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और घुसपैठ रोकने को इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बताया जा रहा है।
सीमा सुरक्षा को लेकर पहले भी उठे थे सवाल
चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सीमा फेंसिंग के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सीमा सुरक्षा से जुड़े कार्यों में प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं पैदा की जा रही हैं। दूसरी ओर राज्य सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपने स्तर पर सहयोग की बात कही थी।
पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश से लगती लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से संवेदनशील मानी जाती रही है। ऐसे में आने वाले समय में सीमा प्रबंधन और सुरक्षा ढांचे को लेकर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।