उत्तराखण्ड

ConvoyReduction – बिहार मंत्रियों ने घटाए काफिले, ईंधन बचत पर जोर…

onvoyReduction – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने की अपील का असर अब बिहार सरकार के कामकाज में भी दिखाई देने लगा है। बुधवार को पटना सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक के दौरान कई मंत्री कम वाहनों के साथ पहुंचे। कुछ मंत्रियों ने तो एक ही वाहन में सफर कर सादगी और संसाधन बचत का संदेश देने की कोशिश की।

सचिवालय परिसर में दिनभर मंत्रियों के छोटे होते काफिलों की चर्चा होती रही। विशेष रूप से जनता दल यूनाइटेड से जुड़े कई मंत्रियों ने अपने वाहन संख्या में कटौती की। सरकार के इस कदम को ईंधन बचत और जिम्मेदार प्रशासनिक व्यवहार से जोड़कर देखा जा रहा है।

कई मंत्री साझा वाहन से पहुंचे

कैबिनेट बैठक में मंत्री अशोक चौधरी, जमा खान और मदन सहनी एक ही वाहन में सचिवालय पहुंचे। वहीं मंत्री दामोदर रावत अकेले एक कार से पहुंचे। कई अन्य मंत्रियों ने भी सीमित वाहनों के साथ यात्रा की।

मंत्री सुनील कुमार, शीला कुमारी, संजय टाइगर और रत्नेश सदा केवल एक-एक वाहन के साथ सचिवालय पहुंचे। इसके अलावा लेशी सिंह, श्रेयसी सिंह, श्रवण कुमार और बुलो मंडल ने भी अपने काफिलों को छोटा रखा।

राजनीतिक हलकों में इसे सरकार की ओर से सार्वजनिक संसाधनों के संयमित उपयोग का संकेत माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने से ईंधन बचत के साथ प्रशासनिक खर्च में भी कमी आ सकती है।

कुछ मंत्रियों के काफिले अपेक्षाकृत बड़े रहे

जहां कई मंत्रियों ने छोटे काफिले अपनाए, वहीं कुछ नेताओं के साथ अपेक्षाकृत अधिक वाहन दिखाई दिए। मंत्री दिलीप जायसवाल पांच गाड़ियों के काफिले के साथ सचिवालय पहुंचे। मंत्री लखेन्द्र पासवान, निशांत कुमार और संतोष कुमार सुमन चार-चार वाहनों के साथ नजर आए।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा तीन गाड़ियों के साथ पहुंचे, जबकि मंत्री मिथिलेश तिवारी दो वाहनों के साथ दिखाई दिए। मंत्री श्वेता गुप्ता, दीपक प्रकाश और इंजीनियर शैलेंद्र भी तीन-तीन गाड़ियों के साथ सचिवालय पहुंचे।

हालांकि, पहले की तुलना में कई काफिलों में कमी देखी गई, जिसे सरकारी स्तर पर सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री इलेक्ट्रिक वाहन से पहुंचे

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कैबिनेट बैठक में इलेक्ट्रिक वाहन से पहुंचे। हालांकि उनके साथ सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को देखते हुए कुल 19 गाड़ियों का काफिला मौजूद रहा। सुरक्षा प्रोटोकॉल के कारण मुख्यमंत्री के काफिले में अधिक वाहनों का होना सामान्य माना जाता है।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में सरकारी स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को और बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके जरिए ईंधन पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

उपमुख्यमंत्री ने दी ईंधन बचत की सलाह

उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने इस बदलाव को देशहित से जुड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ईंधन की बचत करना सभी की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, सरकारी प्रतिनिधियों को भी आवश्यकता के अनुसार ही यात्रा करनी चाहिए और वाहनों की संख्या सीमित रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि संसाधनों का संतुलित उपयोग केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। सरकार के भीतर अब इस दिशा में जागरूकता बढ़ रही है और कई मंत्री स्वेच्छा से अपने काफिलों को छोटा कर रहे हैं।

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