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DigitalGovernance – ऑनलाइन सरकारी प्रक्रियाओं से छोटे कारोबारों को मिला बड़ा फायदा

DigitalGovernance – भारत में सरकारी सेवाओं के तेजी से डिजिटल होने का असर अब छोटे कारोबारों की कार्यक्षमता पर भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन राज्यों ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक ऑनलाइन किया, वहां छोटे व्यवसायों की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल सुधारों ने कारोबार करने की प्रक्रिया को सरल बनाया है और कंपनियों के बीच का अंतर भी कम किया है।

यह अध्ययन वर्ष 2010-11 और 2015-16 के राष्ट्रीय सर्वेक्षण आंकड़ों पर आधारित है। इसमें अलग-अलग राज्यों के छोटे और मध्यम कारोबारों का विश्लेषण किया गया। खासतौर पर उन राज्यों पर ध्यान दिया गया, जहां टैक्स फाइलिंग, लाइसेंस, निरीक्षण और विवाद समाधान जैसी सरकारी प्रक्रियाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित किया गया।

डिजिटल सुधारों से बदला कारोबारी माहौल

रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन राज्यों ने ऑनलाइन प्रशासनिक सुधारों को तेजी से अपनाया, वहां कारोबारों की काम करने की क्षमता में लगातार बढ़ोतरी हुई। छोटे कारोबारियों को पहले जहां सरकारी कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, वहीं अब अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन होने से समय और खर्च दोनों में कमी आई है।

ऑनलाइन सेवाओं के कारण पारदर्शिता भी बढ़ी है। कारोबारियों को अनुमति या मंजूरी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ रहा और प्रक्रियाएं पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हुई हैं। इससे छोटे व्यवसायों के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल भी बेहतर बना है।

98-पॉइंट एक्शन प्लान का असर

रिपोर्ट में वर्ष 2014 में लागू किए गए “98-पॉइंट एक्शन प्लान” का भी उल्लेख किया गया है। इस योजना का उद्देश्य कारोबार से जुड़े नियमों को आसान बनाना और सरकारी प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना था।

इसके तहत टैक्स सिस्टम, निर्माण अनुमति, श्रम और पर्यावरण नियम, निरीक्षण प्रक्रिया, व्यावसायिक विवाद और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस जैसे क्षेत्रों में सुधार किए गए। IMF के मुताबिक, इन सुधारों का सकारात्मक असर खासकर छोटे और मध्यम कारोबारों पर अधिक देखने को मिला।

छोटे कारोबारियों को मिली राहत

रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद छोटे कारोबारियों की निर्भरता सरकारी दफ्तरों पर कम हुई है। ऑनलाइन टैक्स फाइलिंग, डिजिटल मंजूरी और ऑटोमेटेड प्रक्रियाओं ने कामकाज को तेज किया है। इससे अनावश्यक देरी और अतिरिक्त खर्च में कमी आई है।

IMF ने यह भी कहा कि डिजिटल प्रक्रियाओं से भ्रष्टाचार और अनौपचारिक भुगतान जैसे मामलों में भी कमी देखने को मिली है। कारोबारियों के लिए नियमों का पालन करना पहले से आसान हुआ है, जिससे उनकी उत्पादकता में सुधार दर्ज किया गया।

शुरुआती सुधार सबसे ज्यादा प्रभावी

अध्ययन में एक दिलचस्प तथ्य भी सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल सुधारों का सबसे ज्यादा असर शुरुआती चरण में दिखाई दिया। जैसे-जैसे सुधारों का विस्तार हुआ, अतिरिक्त लाभ की गति थोड़ी धीमी पड़ गई। इसका मतलब है कि शुरुआत में लागू किए गए बदलावों ने सबसे बड़ा प्रभाव छोड़ा।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल गवर्नेंस ने छोटे कारोबारों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मदद की है। इससे रोजगार और उत्पादन क्षमता दोनों को मजबूती मिली है।

MSME सेक्टर को मिला सहारा

भारत का MSME सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह क्षेत्र लाखों लोगों को रोजगार देता है और मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में बड़ा योगदान करता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल सुधारों ने इस सेक्टर को अधिक प्रतिस्पर्धी और सक्षम बनाने में अहम योगदान दिया है।

IMF का मानना है कि डिजिटल प्रशासन और बिजनेस सुधारों की दिशा में आगे बढ़ते प्रयास देश की आर्थिक वृद्धि को और गति दे सकते हैं।

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