उत्तराखण्ड

HaridwarFaith – हरकी पैड़ी पर गंगा में कुत्ता नहलाने से बढ़ा विवाद

HaridwarFaith – हरिद्वार में कुंभ से पहले धार्मिक मर्यादाओं और घाटों की व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। हर की पैड़ी क्षेत्र में एक महिला द्वारा पालतू कुत्ते को गंगा में नहलाने और गंग नहर में कुछ युवकों के मछलियां मारने की घटनाओं ने धार्मिक संगठनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ा दी है। दोनों घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

हर की पैड़ी घाट पर हुआ विवाद

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हरियाणा और दिल्ली से आई कुछ महिलाएं हर की पैड़ी घाट पर पहुंचीं थीं। इसी दौरान एक महिला ने अपने पालतू कुत्ते को गंगा में उतारकर नहलाना शुरू कर दिया। घाट पर मौजूद लोगों और व्यवस्थापकों ने इसका विरोध किया और महिला को ऐसा करने से रोकने की कोशिश की।

बताया जा रहा है कि इस दौरान महिला और वहां मौजूद कर्मचारियों के बीच बहस भी हुई। विरोध के बावजूद महिला ने कुत्ते को गंगा में नहलाया। घटना के बाद घाट पर मौजूद कई श्रद्धालुओं ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला बताया और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए।

गंग नहर में मछलियां मारने का वीडियो भी सामने आया

इसी बीच गंग नहर के एक हिस्से से दूसरी घटना सामने आई, जहां कुछ युवक हाथों में डंडे लेकर पानी में मछलियां मारते दिखाई दिए। जानकारी के अनुसार, यह इलाका निर्माण कार्य के पास का था और वहां मौजूद युवकों ने खुलेआम मछलियों को निशाना बनाया।

स्थानीय लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि युवकों ने उल्टा उन्हें डांटकर वहां से हटा दिया। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों में नाराजगी बढ़ गई। कई लोगों का कहना है कि धार्मिक महत्व वाले क्षेत्रों में इस तरह की गतिविधियां लगातार चिंता बढ़ा रही हैं।

धार्मिक संगठनों ने जताई नाराजगी

घटनाओं को लेकर कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष अधीर कौशिक ने कहा कि हरिद्वार केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे स्थानों पर धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं का पालन होना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि गंगा घाटों की पवित्रता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक, गंगा में पालतू जानवरों को नहलाना और नहरों में मछलियों को मारना धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला व्यवहार माना जा रहा है।

कुंभ से पहले प्रशासन पर उठे सवाल

कुंभ मेले की तैयारियों के बीच सामने आई इन घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। धार्मिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं दिखाई गई तो बड़े आयोजन के दौरान स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

अधीर कौशिक ने कहा कि हर की पैड़ी जैसी संवेदनशील जगह पर हुई घटना के बावजूद अब तक किसी अधिकारी की ओर से स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो कुंभ के दौरान विरोध प्रदर्शन भी किया जा सकता है।

हरिद्वार की धार्मिक पहचान पर चिंता

हरिद्वार लंबे समय से धार्मिक आस्था और परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां शराब, मांस और अन्य कई गतिविधियों पर पहले से प्रतिबंध लागू है। ऐसे में लगातार सामने आ रही घटनाओं ने स्थानीय लोगों और संत समाज की चिंता बढ़ा दी है।

लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को स्थानीय नियमों और परंपराओं का पालन करना चाहिए ताकि शहर की धार्मिक गरिमा बनी रहे।

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