EmergencyAlert – देशभर में मोबाइल आपदा चेतावनी सिस्टम का हुआ परीक्षण
EmergencyAlert – देश में आपातकालीन संचार व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में शनिवार को एक महत्वपूर्ण तकनीकी परीक्षण किया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और दूरसंचार विभाग की ओर से मोबाइल आधारित सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम की टेस्टिंग शुरू की गई, जिसके तहत लोगों के मोबाइल फोन पर चेतावनी संदेश भेजे गए। इस दौरान कई उपयोगकर्ताओं के फोन पर तेज अलर्ट टोन और वाइब्रेशन भी महसूस किए गए।

अधिकारियों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह किसी वास्तविक आपदा से जुड़ा संदेश नहीं है, बल्कि केवल सुरक्षा प्रणाली की जांच के लिए आयोजित अभ्यास है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में किसी प्राकृतिक या मानव निर्मित संकट की स्थिति में लोगों तक तेजी से सूचना पहुंचाई जा सके।
लोगों से घबराने की बजाय सतर्क रहने की अपील
प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की है कि मोबाइल पर इस तरह का अलर्ट आने पर घबराने की आवश्यकता नहीं है। अधिकारियों के अनुसार, यह एक नियमित तकनीकी अभ्यास है और आम लोगों को इस पर कोई प्रतिक्रिया देने या किसी प्रकार की कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है।
संचार मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी में बताया गया कि इस मोबाइल चेतावनी प्रणाली की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की मौजूदगी में की गई। इस परियोजना को दूरसंचार विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मिलकर तैयार किया है।
सरकार का मानना है कि आपदा के समय शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं। ऐसे में यदि लोगों तक तुरंत चेतावनी पहुंचती है तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
तय समय पर भेजे गए परीक्षण संदेश
आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में इस सिस्टम की टेस्टिंग निर्धारित समय के भीतर की गई। अधिकारियों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में सुबह 11:15 बजे से दोपहर 12:15 बजे के बीच मोबाइल अलर्ट भेजे गए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी संबंधित एजेंसियों ने इस अभ्यास की जानकारी साझा की।
एनडीएमए के मुताबिक, इस तकनीक का उद्देश्य पूरे देश में एक समान और तेज चेतावनी नेटवर्क तैयार करना है। इससे भविष्य में मौसम, भूकंप, बाढ़ या अन्य संकट की जानकारी सीधे नागरिकों तक पहुंचाई जा सकेगी।
कई राज्यों और शहरों को किया गया शामिल
यह परीक्षण केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली-एनसीआर समेत विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में भी यह अभ्यास किया गया। हालांकि कुछ संवेदनशील और सीमावर्ती क्षेत्रों को फिलहाल इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
रिपोर्टों के अनुसार, जिन राज्यों में चुनावी प्रक्रिया चल रही है, वहां मोबाइल अलर्ट टेस्ट नहीं किया गया ताकि मतदान गतिविधियों पर कोई असर न पड़े। पश्चिम बंगाल में भी यह अभ्यास नहीं हुआ क्योंकि वहां कुछ मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान जारी था।
प्राकृतिक और औद्योगिक आपदाओं में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों के अनुसार, यह चेतावनी प्रणाली भविष्य में आपदा प्रबंधन का अहम हिस्सा बन सकती है। इसका इस्तेमाल सुनामी, भूकंप, आकाशीय बिजली, चक्रवात और बाढ़ जैसी प्राकृतिक घटनाओं के दौरान किया जाएगा। इसके अलावा गैस रिसाव, रासायनिक दुर्घटनाओं और अन्य औद्योगिक हादसों की स्थिति में भी यह तकनीक लोगों को समय रहते सतर्क कर सकेगी।
सरकार का लक्ष्य ऐसी प्रणाली विकसित करना है, जिससे कुछ ही सेकंड में लाखों मोबाइल उपयोगकर्ताओं तक चेतावनी संदेश पहुंच सके। इससे प्रशासन को राहत और बचाव कार्यों के लिए भी अतिरिक्त समय मिल पाएगा।
तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के परीक्षण नियमित रूप से किए जाने जरूरी हैं ताकि सिस्टम की क्षमता और विश्वसनीयता बनी रहे। आने वाले समय में इस नेटवर्क को और अधिक उन्नत बनाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।