उत्तराखण्ड

PrimarySchoolClosure – छात्र संख्या घटने से बंद हुआ इस गांव का स्कूल

PrimarySchoolClosure – पहाड़ के एक छोटे से गांव में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय पैंया अब पूरी तरह शांत हो चुका है। कभी बच्चों की आवाजों और पढ़ाई की गतिविधियों से भरा रहने वाला यह विद्यालय अब बंद कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने शून्य छात्र संख्या के कारण विद्यालय को औपचारिक रूप से बंद करने का फैसला लिया। इस निर्णय के बाद गांव में भावनात्मक माहौल देखने को मिला, क्योंकि यह स्कूल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि कई पीढ़ियों की यादों से जुड़ा हुआ था।

शिक्षा विभाग ने हटाया स्कूल का सामान

बृहस्पतिवार को शिक्षा विभाग की टीम ग्राम प्रधान रजनी देवी की मौजूदगी में विद्यालय पहुंची और वहां रखी सभी शैक्षणिक सामग्री को दूसरे स्कूल में स्थानांतरित कर दिया। विद्यालय में मौजूद कुर्सियां, मेज, ब्लैकबोर्ड, खेल सामग्री, चटाइयां, दरियां और मध्याह्न भोजन से जुड़े बर्तन वाहन के जरिए राजकीय प्राथमिक विद्यालय बिंजाखेत भेजे गए।

अधिकारियों के अनुसार, बिंजाखेत विद्यालय में वर्तमान समय में 15 छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं और वहां इन संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग और बच्चों को व्यवस्थित शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

गांव में दिखा भावनात्मक माहौल

विद्यालय बंद होने के दौरान गांव के कई लोग मौके पर मौजूद रहे। स्थानीय निवासियों और पुराने छात्रों ने इस पल को भावुक बताया। कई ग्रामीणों का कहना था कि यह स्कूल गांव की पहचान का हिस्सा था। यहां केवल पढ़ाई नहीं होती थी, बल्कि सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी केंद्र यही विद्यालय था।

पुराने छात्रों ने बताया कि इसी स्कूल से उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा हासिल की थी। विद्यालय परिसर और वहां रखी पुरानी चीजों से उनकी कई बचपन की यादें जुड़ी हुई थीं। स्कूल का बंद होना उनके लिए केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि भावनात्मक नुकसान जैसा महसूस हो रहा है।

पूर्व छात्रों ने साझा की अपनी यादें

विद्यालय बंद होने की प्रक्रिया के दौरान कई पूर्व छात्र भावुक नजर आए। अनिल कपरूवान, मनोज कपरूवान और विजय जैसे पुराने छात्रों ने कहा कि उन्होंने इन्हीं कमरों और दरियों पर बैठकर पढ़ना सीखा था। उन्होंने बताया कि स्कूल की सामग्री को बाहर जाते देख ऐसा लगा मानो उनका बचपन भी उनसे दूर हो रहा हो।

ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में लगातार कम होती छात्र संख्या और पलायन के कारण ऐसे कई विद्यालय प्रभावित हो रहे हैं। लोगों ने चिंता जताई कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में ग्रामीण क्षेत्रों की शैक्षणिक और सामाजिक संरचना पर इसका असर पड़ सकता है।

शिक्षा विभाग ने बताई वजह

खंड शिक्षा अधिकारी केएस टोलिया ने कहा कि विद्यालय में लंबे समय से कोई छात्र नामांकित नहीं था। इसी कारण विभाग को स्कूल बंद करने का निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने बताया कि स्कूल के सभी संसाधनों को बिंजाखेत विद्यालय भेज दिया गया है, जहां छात्रों की आवश्यकता के अनुसार उनका उपयोग किया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि गांव के लोगों के लिए यह फैसला भावनात्मक रूप से काफी भारी साबित हुआ है।

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