LadakhPolitics – अमित शाह के दौरे पर कांग्रेस ने उठाए कई सवाल
LadakhPolitics – केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया लद्दाख दौरे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि सरकार धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को प्रमुखता देकर लद्दाख से जुड़े मूल राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राज्य के दर्जे, भूमि अधिकार और स्थानीय रोजगार सुरक्षा जैसे लंबे समय से लंबित विषयों पर अब तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।

जयराम रमेश ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गृह मंत्री इस समय भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी में व्यस्त हैं, लेकिन लद्दाख के लोगों की प्रमुख मांगों पर चुप्पी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लद्दाख में राज्य का दर्जा बहाल करने, संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण देने और स्थानीय संसाधनों व नौकरियों की सुरक्षा जैसे मुद्दे लगातार उठाए जा रहे हैं।
रमेश ने कहा कि ये केवल राजनीतिक मांगें नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक संतुलन से जुड़ी चिंताएं हैं। कांग्रेस का कहना है कि केंद्र सरकार को इन मुद्दों पर स्पष्ट और सार्वजनिक रुख अपनाना चाहिए।
ऐतिहासिक घटनाओं का भी किया उल्लेख
अपने बयान में जयराम रमेश ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1949 के लद्दाख दौरे को याद किया। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश शासन के दौरान सांची स्तूप से भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों सारिपुत्र और महा मोग्गलान के पवित्र अवशेषों को निकालकर लंदन ले जाया गया था। बाद में स्वतंत्रता के बाद इन अवशेषों को भारत वापस लाया गया।
रमेश के अनुसार, 14 जनवरी 1949 को ये अवशेष भारत पहुंचे और नेहरू ने उन्हें महाबोधि सोसाइटी को सौंपा। उसी वर्ष जुलाई में नेहरू लद्दाख गए थे, जहां बौद्ध धर्मगुरु कुशोक बकुला रिनपोछे ने उनसे आग्रह किया था कि इन पवित्र अवशेषों को लद्दाख भी लाया जाए ताकि स्थानीय लोग उनके दर्शन कर सकें।
लद्दाख में 79 दिनों तक हुई थी प्रदर्शनी
कांग्रेस नेता ने बताया कि यह मांग बाद में स्वीकार की गई और मई 1950 में इन अवशेषों को 79 दिनों तक लद्दाख के अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शित किया गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद ये पवित्र अवशेष म्यांमार, श्रीलंका और सांची जैसे स्थानों पर भी ले जाए गए। कांग्रेस का कहना है कि इतिहास में सांस्कृतिक पहल के साथ-साथ क्षेत्रीय संवेदनाओं को भी महत्व दिया गया था और आज भी उसी संतुलन की जरूरत है।
राज्य के दर्जे पर जवाब मांग रही कांग्रेस
कांग्रेस ने एक दिन पहले भी केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के तहत लाने को लेकर सरकार की क्या नीति है। पार्टी नेताओं का कहना है कि स्थानीय समुदाय लंबे समय से इन मुद्दों को उठा रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
अमित शाह ने प्रदर्शनी में लिया हिस्सा
गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह गुरुवार को लद्दाख पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में हिस्सा लिया। यह आयोजन भारत में पहली बार आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में बौद्ध अनुयायी और स्थानीय लोग शामिल हुए।