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WheatExport – अतिरिक्त 25 लाख टन गेहूं निर्यात को मिली मंजूरी…

WheatExport – केंद्र सरकार ने देश में उपलब्ध पर्याप्त गेहूं भंडार और अच्छी पैदावार के अनुमान को देखते हुए निर्यात नीति में सीमित ढील दी है। वाणिज्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 25 लाख टन अतिरिक्त गेहूं निर्यात की अनुमति को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। यह फैसला 20 अप्रैल को लिया गया था और अब इसके लागू होने से निर्यात का दायरा और स्पष्ट हो गया है। सरकार का मानना है कि घरेलू जरूरतों को प्रभावित किए बिना यह कदम उठाया गया है।

कुल निर्यात मंजूरी का आंकड़ा बढ़ा

नई अनुमति के बाद अब तक कुल 50 लाख टन गेहूं और 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी मिल चुकी है। इससे पहले जनवरी और फरवरी में भी चरणबद्ध तरीके से निर्यात की अनुमति दी गई थी। पहले 5 लाख टन गेहूं उत्पाद और फिर अतिरिक्त मात्रा को मंजूरी देकर सरकार ने धीरे-धीरे निर्यात का दायरा बढ़ाया है। इस क्रमिक नीति से यह संकेत मिलता है कि सरकार घरेलू बाजार और वैश्विक मांग के बीच संतुलन बनाए रखना चाहती है।

नीति अब भी प्रतिबंधित श्रेणी में

हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि गेहूं की निर्यात नीति पूरी तरह मुक्त नहीं की गई है। DGFT की अधिसूचना के अनुसार, गेहूं अभी भी ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में ही आता है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति दी जा रही है। इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्यात प्रक्रिया नियंत्रित और पारदर्शी तरीके से हो।

खाद्य सुरक्षा के तहत अलग प्रावधान

सरकार ने 2022 में तय किए गए उस प्रावधान को भी बरकरार रखा है, जिसके तहत जरूरतमंद देशों को उनकी खाद्य सुरक्षा के लिए गेहूं निर्यात किया जा सकता है। यह निर्यात संबंधित देशों के अनुरोध और भारत सरकार की मंजूरी के आधार पर होता है। खास बात यह है कि इस श्रेणी में किया गया निर्यात मौजूदा 25 लाख टन के कोटे से अलग माना जाएगा, जिससे आपात जरूरतों को पूरा करने में लचीलापन बना रहे।

बंपर उत्पादन ने बढ़ाया भरोसा

इस फैसले के पीछे कृषि क्षेत्र से जुड़े सकारात्मक संकेत एक प्रमुख कारण हैं। कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 में देश का गेहूं उत्पादन 120.2 मिलियन टन तक पहुंचने का अनुमान है। इसके पीछे बुवाई क्षेत्र में हुई बढ़ोतरी अहम रही है। रबी सीजन के दौरान गेहूं की बुवाई 33.41 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंच गई, जो पिछले साल के मुकाबले अधिक है। इस बढ़ोतरी ने उत्पादन के आंकड़ों को मजबूत आधार दिया है।

वैश्विक बाजार में भारत की भूमिका

सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर पर्याप्त भंडार होने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारत की उपस्थिति बनाए रखना जरूरी है। अतिरिक्त निर्यात की अनुमति से जहां वैश्विक स्तर पर मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी, वहीं भारत की विश्वसनीय आपूर्ति क्षमता भी मजबूत होगी। साथ ही, जरूरतमंद देशों की खाद्य सुरक्षा में सहयोग देने की नीति भी जारी रहेगी।

आगे की रणनीति पर नजर

आने वाले समय में सरकार की निगाह घरेलू कीमतों और भंडार की स्थिति पर बनी रहेगी। यदि बाजार में संतुलन बना रहता है, तो निर्यात नीति में आगे भी इसी तरह के संतुलित कदम देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल, यह फैसला कृषि उत्पादन और आर्थिक संतुलन दोनों को ध्यान में रखकर लिया गया माना जा रहा है।

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