KarnatakaPolitics – दावणगेरे उपचुनाव के बाद पद से हटाए गए नसीर अहमद
KarnatakaPolitics – कर्नाटक की राजनीति में दावणगेरे दक्षिण विधानसभा उपचुनाव के बाद हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के राजनीतिक सचिव और कांग्रेस एमएलसी नसीर अहमद को उनके पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। आधिकारिक आदेश जारी करते हुए सरकार ने इस फैसले की पुष्टि की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उपचुनाव के दौरान पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ काम करने के आरोपों के चलते यह कार्रवाई की गई है।

उपचुनाव के बाद सामने आया विवाद
दावणगेरे दक्षिण सीट पर उपचुनाव वरिष्ठ नेता शमनूर शिवशंकरप्पा के निधन के बाद कराया गया था। कांग्रेस ने इस सीट से उनके पोते समर्थ शमनूर को उम्मीदवार बनाया। समर्थ राज्य के मंत्री एस.एस. मल्लिकार्जुन के पुत्र हैं। उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें सामने आने लगी थीं, जो अब खुलकर सामने आ गई हैं।
आंतरिक असंतोष की पृष्ठभूमि
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ नेताओं ने उम्मीदवार चयन को लेकर आपत्ति जताई थी। खासकर स्थानीय स्तर पर कुछ नेताओं का मानना था कि टिकट किसी अन्य समुदाय से दिया जाना चाहिए था। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद बढ़ते गए और कई नेता चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रहे।
मुस्लिम नेतृत्व की नाराजगी
दावणगेरे दक्षिण क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय की अच्छी संख्या होने के कारण वहां से मुस्लिम उम्मीदवार उतारने की मांग उठ रही थी। कुछ नेताओं ने खुले तौर पर यह सुझाव भी दिया था कि समुदाय के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार का चयन किया जाए। हालांकि पार्टी ने अलग रणनीति अपनाई, जिससे असंतोष और गहरा गया।
बैठक में उठी थीं मांगें
इस मुद्दे को लेकर मार्च में एक अहम बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय और अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े नेता शामिल हुए थे। बैठक के दौरान नेताओं ने अपनी बात खुलकर रखी और उम्मीदवार चयन पर पुनर्विचार की मांग की। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने अपने फैसले में कोई बदलाव नहीं किया।
बागी रुख और प्रचार से दूरी
उम्मीदवार घोषित होने के बाद एक अन्य नेता ने निर्दलीय तौर पर नामांकन भी दाखिल किया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। इसके बावजूद पार्टी के भीतर असंतोष पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। कई नेताओं के चुनाव प्रचार में सक्रिय रूप से भाग न लेने की बात भी सामने आई, जिससे संगठनात्मक एकजुटता पर असर पड़ा।
नसीर अहमद पर क्या आरोप
पार्टी सूत्रों का कहना है कि नसीर अहमद पर आरोप है कि उन्होंने उपचुनाव के दौरान अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई और संगठनात्मक जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं किया। इसी के आधार पर उन्हें पद से हटाने का निर्णय लिया गया। हालांकि इस मामले में आधिकारिक तौर पर विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
अन्य नेताओं की भूमिका पर नजर
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री को भी मुख्यमंत्री ने चर्चा के लिए बुलाया था। इससे संकेत मिलता है कि पार्टी नेतृत्व इस मामले को गंभीरता से देख रहा है और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। साथ ही अन्य नेताओं की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।
आगे की रणनीति पर नजर
दावणगेरे उपचुनाव के बाद सामने आई यह स्थिति कांग्रेस के लिए संगठनात्मक चुनौती के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में पार्टी किस तरह आंतरिक मतभेदों को सुलझाती है और संगठन को मजबूत करती है, यह राजनीतिक रूप से अहम होगा।



