EarthHour – उत्तराखंड में आज रात एक घंटे बिजली बचाने की पहल
EarthHour – उत्तराखंड में आज यानी 28 मार्च को ‘अर्थ ऑवर’ के तहत एक विशेष पर्यावरणीय पहल आयोजित की जा रही है। राज्य सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक गैर-जरूरी लाइटें और बिजली से चलने वाले उपकरण बंद रखें। इस एक घंटे के प्रतीकात्मक कदम के जरिए ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने की कोशिश की जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर सामूहिक प्रयास
यह पहल केवल बिजली बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के सीमित होने का एहसास कराना भी है। सरकार का मानना है कि अगर हर व्यक्ति छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करे, तो बड़े स्तर पर सकारात्मक असर देखा जा सकता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए एक संतुलित और सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने का संदेश दिया जा रहा है।
वैश्विक अभियान का हिस्सा है ‘अर्थ ऑवर’
‘अर्थ ऑवर’ कोई स्थानीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय अभियान है, जिसे वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर के सहयोग से दुनिया के कई देशों में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी और तब से यह हर साल मार्च के अंतिम शनिवार को आयोजित किया जाता है। इस बार यह अभियान अपने 20वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई है।
नागरिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील
राज्य सरकार और संबंधित संस्थाओं ने लोगों से आग्रह किया है कि वे इस पहल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों पर अनावश्यक बिजली उपयोग को एक घंटे के लिए बंद रखने से न केवल ऊर्जा की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। यह एक सामूहिक प्रयास है, जिसमें हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
जलवायु परिवर्तन के प्रति बढ़ती चिंता
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम, तापमान में असामान्य उतार-चढ़ाव और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं जलवायु परिवर्तन की ओर इशारा करती हैं। ऐसे में ऊर्जा के संतुलित उपयोग और संसाधनों के संरक्षण पर जोर देना जरूरी हो गया है। ‘अर्थ ऑवर’ जैसे अभियान इसी दिशा में लोगों को जागरूक करने का माध्यम बनते हैं।
सीमित संसाधनों के समझदारी से उपयोग की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली और अन्य संसाधनों का उपयोग आवश्यकता के अनुसार ही किया जाना चाहिए। अनावश्यक खपत को कम करके न केवल पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है, बल्कि आने वाले समय के लिए संसाधनों को सुरक्षित भी रखा जा सकता है। इस तरह के अभियानों से लोगों की सोच में बदलाव लाने की कोशिश की जाती है।