AryanKhanCase – समीर वानखेड़े ने रिश्वत के आरोपों से किया साफ इनकार
AryanKhanCase – आर्यन खान से जुड़े चर्चित क्रूज ड्रग्स मामले में एक बार फिर कानूनी बहस तेज हो गई है। इस मामले में नाम आने के बाद से विवादों में रहे एनसीबी के पूर्व जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने अपने ऊपर लगे रिश्वत के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने अभिनेता शाहरुख खान से किसी भी तरह की धनराशि की मांग नहीं की थी। इस बयान के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

कोर्ट में क्या कहा समीर वानखेड़े ने
सुनवाई के दौरान समीर वानखेड़े की ओर से पेश दलीलों में कहा गया कि आर्यन खान की गिरफ्तारी के बाद शाहरुख खान से किसी तरह की डील या पैसे की मांग का आरोप पूरी तरह निराधार है। उनके वकील ने अदालत को बताया कि यह आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और इन्हें गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके मुवक्किल ने अपने कार्यकाल के दौरान कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की थी।
वकील ने रखी अदालत के सामने दलीलें
वानखेड़े की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने कोर्ट में विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें समीर वानखेड़े ने केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है। यह एफआईआर मई 2023 में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोपों के तहत दर्ज की गई थी। पोंडा ने दलील दी कि इस मामले में लगाए गए आरोप न केवल बेबुनियाद हैं, बल्कि इससे एक अधिकारी की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है।
एफआईआर रद्द करने की मांग पर सुनवाई जारी
इस पूरे मामले में समीर वानखेड़े ने अदालत से अनुरोध किया है कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द किया जाए। उनका कहना है कि जांच एजेंसी द्वारा दर्ज किए गए आरोप तथ्यों पर खरे नहीं उतरते और यह मामला कानूनन टिकाऊ नहीं है। अदालत में इस मुद्दे पर विस्तृत बहस जारी है और दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें रख रहे हैं।
मामले ने पहले भी बटोरी थी सुर्खियां
आर्यन खान ड्रग्स केस पहले ही देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है। इस मामले से जुड़े हर नए घटनाक्रम पर लोगों की नजर बनी रहती है। अब जब रिश्वत के आरोपों को लेकर अदालत में सुनवाई चल रही है, तो यह देखना अहम होगा कि आगे इस मामले में क्या कानूनी मोड़ आता है।
आगे की सुनवाई पर टिकी नजरें
फिलहाल अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी हैं और मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस का फैसला कई अहम पहलुओं को स्पष्ट कर सकता है, खासकर जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही के संदर्भ में


