उत्तराखण्ड

Uttarakhand Ration Card EKYC Update: राशन कार्ड धारकों की हुई मौज, मासूमों की ई-केवाईसी के झंझट से मिली बड़ी राहत

Uttarakhand Ration Card EKYC Update: उत्तराखंड में राशन कार्ड धारकों के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने भारत सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए अब पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए (Mandatory EKYC Exemption) की घोषणा कर दी है। इस फैसले से उन हजारों माता-पिताओं के चेहरे पर मुस्कान आ गई है, जो अपने छोटे बच्चों को लेकर बायोमेट्रिक मशीनों के चक्कर काट रहे थे। अब इन मासूमों को अगले एक साल तक इस प्रक्रिया से पूरी तरह छूट दी गई है, जिससे राशन वितरण प्रणाली में सुगमता आएगी।

Uttarakhand Ration Card EKYC Update
Uttarakhand Ration Card EKYC Update

चार लाख कार्ड धारकों को मिलेगा सीधा फायदा

इस नए नियम के लागू होने के बाद उत्तराखंड के लगभग चार लाख राशन कार्ड धारकों को बड़ी राहत मिलने वाली है। वर्तमान में (Public Distribution System) के तहत बच्चों के अंगूठे के निशान मैच न होने के कारण कई परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। छोटे बच्चों के फिंगरप्रिंट्स अक्सर बायोमेट्रिक मशीन पर सही तरीके से नहीं आते थे, जिससे ई-केवाईसी की प्रक्रिया अधूरी रह जाती थी। अब सरकार ने इस तकनीकी समस्या को समझते हुए एक साल की समय सीमा तय कर दी है।

देहरादून में राशन कार्डों का गणित और ई-केवाईसी

अकेले देहरादून जिले की बात करें तो यहां राशन कार्डों की संख्या काफी अधिक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार दून में करीब 3.75 लाख राशन कार्ड जारी किए गए हैं, जिनमें (Antyodaya Anna Yojana) के लाभार्थी भी शामिल हैं। कुल 14.73 लाख यूनिट्स में से लगभग 70 हजार यूनिट्स सिर्फ पांच साल से कम उम्र के बच्चों की हैं। जिला पूर्ति अधिकारी के अनुसार, इन सभी बच्चों के परिवारों को केवाईसी की जटिलता से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है, जिससे दून के निवासियों को बड़ी मानसिक शांति मिली है।

पांच से छह साल के बीच कराना होगा बायोमेट्रिक अपडेट

भले ही अभी के लिए राहत दे दी गई है, लेकिन यह छूट स्थायी नहीं है। जैसे ही बच्चा पांच साल की उम्र पार करेगा, राशन कार्ड धारक को उसकी (Biometric Identity Update) करानी अनिवार्य होगी। पांच से छह साल के बीच की अवधि में बच्चों के शारीरिक विकास के साथ उनके बायोमेट्रिक्स भी स्थिर हो जाते हैं। इसलिए, विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में अनाज की निर्बाध आपूर्ति के लिए माता-पिता को समय रहते आधार और बायोमेट्रिक विवरण अपडेट करवा लेने चाहिए।

राजधानी दून में ई-केवाईसी का आंकड़ा नौ लाख के पार

देहरादून शहर में ई-केवाईसी प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच जबरदस्त जागरूकता देखी जा रही है। शुरुआती दौर में सर्वर की समस्या और जानकारी के अभाव के कारण (Citizen Awareness Program) की गति धीमी थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। अब तक नौ लाख से अधिक लोग सफलतापूर्वक अपनी ई-केवाईसी करवा चुके हैं। जिला प्रशासन की ओर से लगाए गए विशेष कैंपों और उचित दर की दुकानों पर सक्रियता के कारण यह रिकॉर्ड उपलब्धि हासिल हुई है, जो राशन प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।

जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने पुष्टि की है कि छोटे बच्चों की ई-केवाईसी न हो पाने के कारण राशन कार्ड धारकों को काफी कठिनाई हो रही थी। उन्होंने बताया कि (Government Policy Guidelines) में बदलाव के बाद अब फिंगरप्रिंट की समस्या का समाधान हो गया है। अग्रवाल के अनुसार, अब किसी भी पात्र परिवार का राशन सिर्फ इसलिए नहीं रुकेगा कि उनके घर के छोटे बच्चे की केवाईसी नहीं हुई है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है।

खाद्य योजनाओं के लाभार्थियों को मिलेगा सुचारू राशन

उत्तराखंड में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना और राज्य खाद्य योजना के तहत करोड़ों लोगों को रियायती दरों पर अनाज मिलता है। सरकार का मुख्य उद्देश्य (Food Security Benefits) को हर जरूरतमंद तक पहुंचाना है। केवाईसी की प्रक्रिया का मकसद फर्जी कार्डों को हटाना है, लेकिन इस प्रक्रिया में वास्तविक लाभार्थियों को कोई परेशानी न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बच्चों को मिली इस छूट के बाद अब राशन दुकानों पर लगने वाली लंबी कतारों में भी कमी आने की उम्मीद है।

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