Nazim Ali Khan Murder Case Nainital: खर्च-पानी बंद हुआ तो प्रेमिका ही बन गई कातिल, नाजिम अली खान हत्याकांड में कोर्ट ने सुनाया फैसला
Nazim Ali Khan Murder Case Nainital: नैनीताल जिले के भीमताल क्षेत्र में चार साल पहले हुए सनसनीखेज नाजिम अली खान हत्याकांड में कानून का डंडा आखिरकार चल गया है। प्रेम संबंधों और आर्थिक स्वार्थ के चलते अंजाम दी गई इस खौफनाक वारदात में अदालत ने अमरीन जहां और उसके साथी राधेश्याम शुक्ला को दोषी करार दिया है। (Criminal Conspiracy Under 120B) के तहत रची गई इस साजिश का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने कड़ियां जोड़ना शुरू किया। यह मामला न केवल एक हत्या की दास्तान है, बल्कि यह रिश्तों में छिपे लालच और प्रतिशोध का एक काला अध्याय भी है।

भीमताल घूमने के बहाने मौत के सफर पर ले गई प्रेमिका
जनवरी 2020 की वह सर्द सुबह नाजिम के लिए आखिरी साबित हुई। हल्द्वानी की रहने वाली अमरीन जहां ने बड़े ही शातिर तरीके से नाजिम अली को भीमताल घूमने का झांसा दिया। वह उसे (Premeditated Murder Execution) के तहत अपनी स्कूटी पर बैठाकर काठगोदाम-भीमताल रोड की पहाड़ियों पर ले गई। चंदा देवी मंदिर के पास स्थित खतरनाक ‘हेयरपिन बैंड’ पर पहले से ही घात लगाए बैठे राधेश्याम शुक्ला ने योजना के अनुसार हमला बोला और नाजिम की दुनिया उजाड़ दी।
315 बोर के तमंचे से सीने में उतार दी गोली
जैसे ही नाजिम और अमरीन उस सुनसान मोड़ पर पहुंचे, राधेश्याम शुक्ला ने 315 बोर के अवैध तमंचे से नाजिम पर करीब से गोली चला दी। (Fatal Gunshot Wound) के कारण नाजिम ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि राधेश्याम को इस हत्याकांड के लिए खास तौर पर तैयार किया गया था। अदालत ने राधेश्याम को हत्या के साथ-साथ आर्म्स एक्ट के उल्लंघन का भी दोषी पाया है, क्योंकि उसने गैरकानूनी हथियार का इस्तेमाल कर एक बेगुनाह की जान ली थी।
शादी और खर्च-पानी बंद होना बनी हत्या की वजह
पुलिस की गहन तफ्तीश में हत्या के पीछे का असली मकसद ‘पैसा और प्रतिशोध’ निकलकर सामने आया। अमरीन और नाजिम के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध थे, लेकिन नाजिम ने जब किसी अन्य महिला से निकाह कर लिया, तो उनके बीच तल्खी बढ़ गई। नाजिम ने अमरीन को (Financial Support Withdrawal) यानी खर्चा-पानी देना बंद कर दिया था। इसी बात से तिलमिलाई अमरीन ने नाजिम को रास्ते से हटाने के लिए अपने दोस्त राधेश्याम के साथ मिलकर मौत का यह ब्लूप्रिंट तैयार किया।
भाई को फोन कर एक्सीडेंट की झूठी कहानी गढ़ी
वारदात को अंजाम देने के बाद अमरीन ने कानून को गुमराह करने की पूरी कोशिश की। उसने मृतक नाजिम के ही मोबाइल का इस्तेमाल कर उसके भाई वाजिद अली को फोन किया और (Falsified Information Reporting) देते हुए बताया कि नाजिम का एक्सीडेंट हो गया है। हालांकि, पुलिस को मौके पर मिले साक्ष्यों और नाजिम के शरीर पर गोली के निशान देखकर तुरंत शक हो गया कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी हत्या है।
साइंटिफिक एविडेंस ने खोल दी कातिलों की पोल
अदालत में बचाव पक्ष ने अभियुक्तों को निर्दोष बताने की काफी कोशिश की, लेकिन (Forensic Evidence Analysis) के सामने उनकी एक न चली। पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), सीसीटीवी फुटेज और अभियुक्तों की मोबाइल लोकेशन के जरिए यह साबित कर दिया कि घटना के वक्त दोनों आरोपी मौके पर ही मौजूद थे। सबसे बड़ा सबूत वह कारतूस का खोखा बना, जो राधेश्याम के पास से मिले तमंचे और नाजिम के शरीर से निकले नमूने से पूरी तरह मेल खा गया।
जिला जज की अदालत में दोष सिद्ध
जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरीश कुमार गोयल की अदालत ने तमाम गवाहों और सबूतों को सुनने के बाद यह माना कि अमरीन और राधेश्याम ने मिलकर (Cold Blooded Murder Case) को अंजाम दिया है। बचाव पक्ष कोई भी ऐसा ठोस सबूत पेश नहीं कर सका जिससे उनकी बेगुनाही साबित हो सके। अदालत ने दोनों को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 120बी (साजिश) के तहत दोषी करार दिया है। इस फैसले के बाद मृतक के परिजनों को न्याय की उम्मीद जगी है।
सजा के ऐलान पर टिकी हैं सबकी निगाहें
सोमवार को अदालत इन दोनों दोषियों के खिलाफ सजा का आधिकारिक ऐलान करेगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से योजनाबद्ध तरीके से (Death Penalty vs Life Imprisonment) के योग्य इस अपराध को अंजाम दिया गया है, उसे देखते हुए दोषियों को उम्रकैद या उससे भी कड़ी सजा मिल सकती है। चंदा देवी मंदिर के पास हुई इस वारदात ने उस समय पूरे उत्तराखंड को हिला दिया था, और अब चार साल बाद आने वाला यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देगा।



