उत्तराखण्ड

TourismSafety – टाइगर फॉल में बिना अनुमति पर्यटकों की एंट्री पर उठे सवाल

TourismSafety – देहरादून जिले के चकराता स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल टाइगर फॉल को लेकर एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले वर्ष हुए दर्दनाक हादसे के बाद जिस झरने में स्नान पर रोक लगाई गई थी, वहां अब बिना आधिकारिक अनुमति के पर्यटकों की आवाजाही और नहाने की गतिविधियां दोबारा शुरू हो गई हैं। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से अभी तक पूरी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई है, जिसके चलते संभावित खतरे को लेकर चिंता बढ़ गई है।

पिछले साल मई में टाइगर फॉल में एक बड़ा हादसा हुआ था। झरने के ऊपरी हिस्से से अचानक एक भारी पेड़ गिरने से वहां मौजूद दिल्ली की एक महिला पर्यटक और एक स्थानीय युवक की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से झरने में स्नान गतिविधियों पर रोक लगा दी थी और केवल सीमित संख्या में पर्यटकों को दूर से झरना देखने की अनुमति दी गई थी।

संयुक्त निरीक्षण में कई पेड़ पाए गए थे खतरनाक

हादसे के बाद तहसील प्रशासन, वन विभाग और पर्यटन विभाग की संयुक्त टीम ने टाइगर फॉल क्षेत्र का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान झरने के आसपास मौजूद 17 पेड़ों को असुरक्षित श्रेणी में रखा गया था। अधिकारियों का मानना था कि तेज बारिश या तेज हवा के दौरान ये पेड़ कभी भी गिर सकते हैं और पर्यटकों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

वन विभाग ने इन पेड़ों को हटाने के लिए वन निगम को पत्र भी भेजा था, लेकिन अब तक सभी खतरनाक पेड़ों की कटाई नहीं हो सकी है। जानकारी के अनुसार, विभाग की ओर से केवल पांच पेड़ों को काटने की अनुमति दी गई है, जबकि बाकी पेड़ों को लेकर अब भी स्पष्ट निर्णय नहीं हो पाया है।

व्यापारियों ने लंबे समय से उठाई थी मांग

टाइगर फॉल चकराता क्षेत्र का प्रमुख पर्यटन केंद्र माना जाता है। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों और होटल संचालकों की आजीविका जुड़ी हुई है। स्नान गतिविधियों पर रोक लगने के बाद क्षेत्र में पर्यटन कारोबार पर असर पड़ा था।

क्षेत्रीय विकास निगरानी समिति और स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन से कई बार मांग की थी कि जरूरी सुरक्षा कार्य पूरे कर झरने को दोबारा पर्यटकों के लिए खोला जाए। उनका कहना था कि लंबे समय तक प्रतिबंध रहने से छोटे व्यापारियों और स्थानीय दुकानदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इसी मुद्दे को लेकर मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निरीक्षण और कार्रवाई के निर्देश भी दिए थे।

बिना औपचारिक अनुमति शुरू हुई गतिविधियां

मौजूदा पर्यटन सीजन में अचानक बड़ी संख्या में पर्यटक टाइगर फॉल पहुंचने लगे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से पर्यटक न केवल झरने तक जा रहे हैं, बल्कि वहां स्नान भी कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक अनुमति जारी नहीं की गई है।

यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक मानी जा रही है क्योंकि क्षेत्र में मौसम लगातार बदल रहा है। चकराता और आसपास के इलाकों में पिछले एक सप्ताह से रुक-रुक कर बारिश और ओलावृष्टि हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में झरनों का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।

सुरक्षा इंतजामों पर उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों और पर्यावरण से जुड़े जानकारों का कहना है कि जब तक सभी जोखिम वाले पेड़ों को हटाकर पूरी सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक झरने में स्नान की अनुमति देना खतरनाक साबित हो सकता है। उनका मानना है कि पर्यटन को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन पर्यटकों की सुरक्षा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या टाइगर फॉल में सुरक्षा मानकों को लागू करने के लिए कोई नई व्यवस्था की जाती है।

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