Tiger – उत्तराखंड में 16 वर्षों में 215 फीसदी बढ़ी बाघों की संख्या
Tiger- उत्तराखंड ने बाघ संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2006 से 2022 के बीच राज्य में बाघों की संख्या 178 से बढ़कर 560 तक पहुंच गई। इस अवधि में प्रदेश में बाघों की आबादी में लगभग 215 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो इसी दौरान देश के औसत वृद्धि दर से कहीं अधिक है।

राष्ट्रीय औसत से आगे निकला उत्तराखंड
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2006 में पूरे देश में बाघों की संख्या 1,411 थी, जो वर्ष 2022 तक बढ़कर 3,682 हो गई। राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि करीब 161 प्रतिशत रही, जबकि उत्तराखंड में वृद्धि का प्रतिशत इससे लगभग 54 प्रतिशत अंक अधिक रहा। विशेषज्ञ इसे राज्य में वन्यजीव संरक्षण और वन प्रबंधन की प्रभावी रणनीतियों का परिणाम मानते हैं।
संरक्षण प्रयासों का दिखा सकारात्मक असर
वन अधिकारियों का कहना है कि बाघों की संख्या में लगातार हुई बढ़ोतरी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के जंगलों में बेहतर होते पारिस्थितिकी तंत्र का भी संकेत है। संरक्षित वन क्षेत्रों का सुव्यवस्थित प्रबंधन, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, शिकार प्रजातियों की पर्याप्त उपलब्धता और अवैध शिकार पर कड़ी निगरानी जैसे प्रयासों ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राजाजी और कॉर्बेट की रही अहम भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के साथ-साथ राजाजी टाइगर रिजर्व भी बाघ संरक्षण का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। शिवालिक क्षेत्र में स्थित राजाजी टाइगर रिजर्व बाघों सहित कई वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास और प्राकृतिक गलियारे उपलब्ध कराता है। राजाजी टाइगर रिजर्व के सहायक वन संरक्षक (ACF) अजय लिंगवाल ने बताया कि बेहतर संरक्षण उपायों और वन क्षेत्रों की निगरानी से बाघों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है, जिससे उनकी संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई।
बढ़ती आबादी के साथ नई चुनौतियां
वन अधिकारियों का मानना है कि बाघों की संख्या में वृद्धि निश्चित रूप से राज्य के लिए उपलब्धि है, लेकिन इसके साथ संरक्षण की जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। बाघों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित बनाए रखना, वन्यजीव गलियारों की रक्षा करना और मानव-बाघ संघर्ष की घटनाओं को कम करना आने वाले समय की प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी।
दीर्घकालिक संरक्षण पर रहेगा जोर
विशेषज्ञों का कहना है कि विकास परियोजनाओं और बढ़ते मानवीय दबाव के बीच वन क्षेत्रों का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होगा। यदि मौजूदा संरक्षण मॉडल को प्रभावी ढंग से जारी रखा गया और बाघों के सुरक्षित आवागमन के लिए आवश्यक कदम उठाए गए, तो उत्तराखंड भविष्य में भी देश में बाघ संरक्षण का अग्रणी राज्य बना रह सकता है।