Promotion – पांच साल से अटका स्थायीकरण, राजकीय प्रधानाध्यापकों की पदोन्नति पर दिखा असर
Promotion– उत्तराखंड के राजकीय हाईस्कूलों में कार्यरत प्रधानाध्यापकों का स्थायीकरण पिछले करीब पांच वर्षों से लंबित है। इसके चलते उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। अब माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से संबंधित प्रधानाध्यापकों के स्थायीकरण के प्रस्ताव जल्द भेजने को कहा है, ताकि आगे की कार्रवाई पूरी की जा सके।

वर्षों से लंबित है पदोन्नति प्रक्रिया
शिक्षा विभाग में वर्ष 2018 के बाद से शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों की नियमित पदोन्नतियां लगभग ठप पड़ी हैं। इसका असर यह हुआ है कि कई शिक्षक तीन से साढ़े तीन दशक तक सेवा देने के बावजूद उसी पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि विभाग ने हाल ही में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन स्थायीकरण की शर्त के कारण फिर से मामला अटकता दिखाई दे रहा है।
खाली पदों के बावजूद बढ़ी चिंता
शिक्षक संगठनों के अनुसार विभाग में प्रधानाध्यापकों के लगभग 93 प्रतिशत और प्रधानाचार्यों के करीब 90 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इसके बावजूद पदोन्नति की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। पूर्व प्रांतीय महामंत्री रमेश पैन्यूली का कहना है कि अधिकांश प्रधानाध्यापक विभाग में लगभग 35 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं। ऐसे में इस स्तर पर स्थायीकरण को पदोन्नति की अनिवार्य शर्त बनाना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता।
शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल
शिक्षक प्रतिनिधियों का कहना है कि जिन अधिकारियों का पहले प्रवक्ता पद पर रहते हुए स्थायीकरण हो चुका है, उनका प्रधानाध्यापक बनने के बाद समय पर स्थायीकरण किया जाना चाहिए था। उनका तर्क है कि यदि विभाग को यह प्रक्रिया पूरी करनी थी तो प्रोबेशन अवधि समाप्त होने के तुरंत बाद इसे पूरा किया जाना चाहिए था। वर्ष 2021 में पदोन्नत होकर प्रधानाध्यापक बने करीब 350 शिक्षकों में से कई अब सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं।
एलटी शिक्षकों की पदोन्नति भी अटकी
शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक एलटी से प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के लगभग 3500 पद अभी भी लंबित बताए जा रहे हैं। लंबे समय से पदोन्नति न होने के कारण कई शिक्षकों के करियर पर प्रतिकूल असर पड़ा है। संगठनों का यह भी कहना है कि तैयार की जा रही नई वरिष्ठता सूची से आरक्षित वर्ग के कई प्रवक्ताओं की वरिष्ठता प्रभावित हो सकती है। इस मुद्दे को लेकर संबंधित संगठन शिक्षा सचिव से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की तैयारी में हैं।
विभाग ने प्रक्रिया को बताया नियमित
माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद सिमल्टी ने कहा कि प्रत्येक पद के लिए स्थायीकरण की प्रक्रिया अलग-अलग होती है। उनके अनुसार नियमानुसार प्रधानाध्यापकों का स्थायीकरण कराया जा रहा है और विभाग निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई कर रहा है।