उत्तराखण्ड

FireSafety – हल्द्वानी के व्यस्त बाजारों में बढ़ता अग्नि जोखिम, राहत व्यवस्था पर उठे सवाल

FireSafety – हल्द्वानी के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में आग से सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। संकरी गलियां, बढ़ता अतिक्रमण, अव्यवस्थित पार्किंग, सड़क किनारे लगे ठेले और नीचे लटकते बिजली के तार बाजारों को अधिक संवेदनशील बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी भीड़भाड़ वाले बाजार में बड़ी आग लगती है तो दमकल वाहनों के लिए समय पर मौके तक पहुंचना सबसे कठिन चुनौती साबित हो सकती है, जिससे जान-माल के नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।

मटर गली में राहत कार्य पहुंचाना बड़ी चुनौती

रोडवेज के सामने स्थित मटर गली को शहर के सबसे संवेदनशील इलाकों में गिना जा रहा है। करीब 150 मीटर लंबी और बेहद संकरी इस गली में सौ से अधिक दुकानें संचालित हैं, जिनमें कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक सामान का कारोबार प्रमुख है। स्थानीय लोगों के अनुसार गली में नीचे झूलते बिजली के तार और सीमित रास्ता किसी भी आपात स्थिति में राहत कार्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। यहां बड़े दमकल वाहन का प्रवेश लगभग असंभव माना जाता है।

पटेल चौक में अतिक्रमण और पार्किंग बनी परेशानी

मटर गली से आगे स्थित पटेल चौक में भी हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं। दुकानों के बाहर फैला अतिक्रमण, सड़क किनारे लगे ठेले और अव्यवस्थित तरीके से खड़े दोपहिया वाहन यातायात को प्रभावित करते हैं। ऐसे में यदि आग जैसी आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए तो बचाव दल को घटनास्थल तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लग सकता है।

मीरा मार्ग की घटना ने फिर बढ़ाई चिंता

हाल ही में मीरा मार्ग स्थित एक जूते की दुकान में आग लगने की घटना ने बाजार की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से सवाल खड़े किए हैं। यह इलाका भी संकरी गलियों और घनी आबादी वाला है, जहां दिन के समय भारी भीड़ रहती है। स्थानीय स्तर पर माना जा रहा है कि ऐसी परिस्थितियों में दमकल वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और आग पर समय रहते नियंत्रण पाना चुनौतीपूर्ण बन सकता है।

आपातकाल में यातायात प्रबंधन की जरूरत

अक्सर वीआईपी आवागमन के दौरान प्रशासन कुछ ही मिनटों में रास्ता खाली करा देता है, लेकिन आग जैसी आपात स्थितियों में ऐसी व्यवस्था नियमित रूप से देखने को नहीं मिलती। हाल में एक स्कूल में लगी आग के दौरान दमकल टीम समय पर रवाना हुई, लेकिन रास्ते में लगे जाम ने उसकी रफ्तार धीमी कर दी। विशेषज्ञों का मानना है कि अग्निकांड के दौरान हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, इसलिए आपातकालीन वाहनों के लिए प्रभावी यातायात प्रबंधन आवश्यक है।

बेतरतीब पार्किंग से पहले भी प्रभावित हुआ बचाव अभियान

करीब दो वर्ष पहले अंबिका विहार क्षेत्र में एक कपड़ों के गोदाम में आग लगने के दौरान भी दमकल दल को बाधाओं का सामना करना पड़ा था। मुख्य मार्ग तक वाहन पहुंचने के बाद कॉलोनी के भीतर सड़क पर खड़े चारपहिया वाहनों के कारण आगे बढ़ना मुश्किल हो गया। वाहनों को हटाने में समय लगने से राहत और बचाव कार्य में लगभग 20 से 25 मिनट की देरी हुई थी।

घटनास्थल पर भीड़ भी बनती है रुकावट

अग्निकांड के दौरान बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर एकत्र हो जाते हैं। कई लोग मोबाइल से वीडियो बनाने में व्यस्त रहते हैं, जिससे दमकल कर्मियों के काम और वाहनों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न होती है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसी स्थिति में लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए बचाव दल को काम करने देना चाहिए।

अलग-अलग सूचनाओं से बढ़ती है भ्रम की स्थिति

फायर स्टेशन को आग लगने की सूचना मिलने के बाद टीम कुछ ही मिनटों में रवाना हो जाती है। हालांकि एक ही घटना को लेकर कई लोगों की ओर से अलग-अलग जानकारी दिए जाने से शुरुआती आकलन प्रभावित हो सकता है। स्पष्ट और सटीक सूचना मिलने पर बचाव दल बेहतर तैयारी के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो सकता है।

खराब फायर हाईड्रेंट ने बढ़ाई मुश्किल

मीरा मार्ग में हालिया आग की घटना के दौरान दमकल विभाग को रिकॉर्ड में दर्ज दो फायर हाईड्रेंट से पानी लेने का प्रयास करना पड़ा, लेकिन दोनों खराब मिले। सूत्रों के अनुसार इनकी खराब स्थिति की जानकारी पहले से संबंधित विभाग तक नहीं पहुंची थी। इस घटना के बाद शहर में फायर हाईड्रेंट की नियमित जांच और विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।

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