EcoTourism – वसुधारा ट्रैक की सफाई अब स्थानीय समिति के जिम्मे, संरक्षण को मिली नई पहल…
EcoTourism- उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध वसुधारा ट्रैक के संरक्षण और स्वच्छता को लेकर नई पहल शुरू की जा रही है। देश के अंतिम गांव माणा से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित इस धार्मिक और पर्यटन स्थल पर अब स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन ने ट्रैक पर बढ़ते प्लास्टिक कचरे और पर्यावरणीय दबाव को देखते हुए माणा गांव की इको डेवलपमेंट कमेटी (EDC) गठित करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य प्राकृतिक धरोहर की सुरक्षा के साथ स्थानीय लोगों को संरक्षण कार्यों से जोड़ना भी है।

बढ़ते कचरे ने बढ़ाई पर्यावरणीय चिंता
चारधाम यात्रा के दौरान हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक वसुधारा जलप्रपात तक पहुंचते हैं। बढ़ती आवाजाही के साथ प्लास्टिक की बोतलें, खाद्य सामग्री के रैपर और अन्य अपशिष्ट ट्रैक के विभिन्न हिस्सों में जमा होने लगे हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में तेज हवाओं के कारण यह कचरा आसपास के बुग्यालों और संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्रों तक पहुंच जाता है, जिससे वहां की जैव विविधता और पारिस्थितिकी पर असर पड़ने की आशंका बनी रहती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर नियमित सफाई व्यवस्था विकसित करने की योजना बनाई गई है।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क प्रशासन का मानना है कि संरक्षण कार्यों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सबसे प्रभावी साबित हो सकती है। प्रस्तावित इको डेवलपमेंट कमेटी के माध्यम से ट्रैक की नियमित सफाई, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्य किए जाएंगे। इसके साथ ही माणा गांव के युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे, जिससे क्षेत्र में आजीविका और पर्यावरण संरक्षण दोनों को एक साथ बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
पर्यटकों ने भी जताई स्वच्छता की जरूरत
वसुधारा पहुंचे कई श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने ट्रैक पर प्लास्टिक कचरे को चिंता का विषय बताया। तमिलनाडु से आई श्रद्धालु नंदिनी और राजस्थान के बीकानेर से पहुंचे कमल स्वामी ने कहा कि धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस स्थान पर स्वच्छता बनाए रखना सभी की साझा जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो हिमालयी बुग्यालों और आसपास के पर्यावरण पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।
धार्मिक आस्था और प्राकृतिक धरोहर का संगम
समुद्र तल से लगभग 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित वसुधारा जलप्रपात अपनी लगभग 400 फीट ऊंची जलधारा, हिमालयी प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों की स्वर्गारोहण यात्रा के दौरान इसी क्षेत्र के निकट सहदेव ने अपने प्राण त्यागे थे। यही कारण है कि यह स्थल धार्मिक आस्था और प्रकृति प्रेमियों दोनों के लिए विशेष महत्व रखता है। वन विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था के माध्यम से इस ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाए रखने की दिशा में लगातार प्रयास किए जाएंगे।