DharaliDisaster – आपदा के घाव अब भी ताजा, पुनर्वास के साथ लौट रही नई उम्मीद
DharaliDisaster– उत्तराखंड के धराली में आई विनाशकारी आपदा को समय बीत चुका है, लेकिन उसके जख्म आज भी कई परिवारों के जीवन में दिखाई देते हैं। किसी ने अपने परिजन खो दिए तो कई परिवारों के सिर से आशियाना छिन गया। अनेक लोग अब भी किराए के मकानों या रिश्तेदारों के घरों में रह रहे हैं। कठिन परिस्थितियों के बावजूद गांव के लोग धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौटने और आजीविका के नए रास्ते तलाशने का प्रयास कर रहे हैं।

पुनर्वास प्रक्रिया अंतिम चरण में
जिला प्रशासन के अनुसार, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में काम जारी है। 21 परिवारों के लिए भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा 66 लोगों से संबंधित पुनर्वास प्रक्रिया अंतिम चरण में है, जबकि 25 अन्य परिवारों के मामलों में भी जल्द आवश्यक कार्रवाई शुरू की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्य किया जा रहा है।
खेती और बागवानी पर बढ़ा भरोसा
आपदा के बाद गांव के कई लोगों ने अपनी आजीविका का आधार बदलने की कोशिश की है। स्थानीय निवासी अब सेब की बागवानी और नगदी फसलों की खेती को फिर से मजबूत करने में जुटे हैं। उनका मानना है कि कृषि और बागवानी भविष्य में आर्थिक स्थिरता का बेहतर माध्यम बन सकती है। हालांकि, जिन लोगों के होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान क्षतिग्रस्त हुए, उनके लिए अब भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
सुरक्षा इंतजामों की उठी मांग
ग्रामीणों का कहना है कि आपदा के बाद पहले की तरह होटल और पर्यटन से जुड़े व्यवसाय शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है। उनका मानना है कि यदि खीर गंगा क्षेत्र में मजबूत सुरक्षा और संरक्षण कार्य किए जाएं, तो नदी के दोनों किनारों पर बागवानी और खेती को सुरक्षित तरीके से विकसित किया जा सकता है। इससे स्थानीय लोगों की आजीविका को नया सहारा मिलेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी धीरे-धीरे पटरी पर लौट सकेगी।
स्वरोजगार की दिशा में बढ़ रहे कदम
आपदा के बाद युवाओं ने भी रोजगार के नए विकल्प तलाशने शुरू किए हैं। कई स्थानीय युवक-युवतियां पर्यटन और ट्रैकिंग से जुड़े कार्यों की ओर बढ़ रहे हैं। विशेष रूप से युवतियां ट्रैकिंग गतिविधियों के माध्यम से परिवार की आय बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं। वहीं जिन लोगों की दुकानें या अन्य व्यवसाय सुरक्षित बचे थे, वे उन्हें दोबारा व्यवस्थित कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।
दर्द के साथ आगे बढ़ने की कोशिश
धराली के प्रभावित परिवारों का कहना है कि अपनों को खोने का दर्द आज भी उनके साथ है, लेकिन जीवन को आगे बढ़ाना भी जरूरी है। गांव में लोग पुनर्वास, खेती, बागवानी और स्वरोजगार के जरिए नई शुरुआत करने का प्रयास कर रहे हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सरकारी सहायता और पुनर्वास योजनाओं के पूरा होने के बाद उनका जीवन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और स्थिर हो सकेगा।