Almora Bus Accident: देवभूमि की वादियों में पसरा मातम, गहरी खाई में समा गई यात्रियों से भरी बस
Almora Bus Accident: उत्तराखंड के पहाड़ी रास्तों पर एक बार फिर मौत ने अपना तांडव दिखाया है। मंगलवार की सुबह जब लोग नए दिन की शुरुआत कर रहे थे, तभी अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण इलाके से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई। यात्रियों से खचाखच भरी एक बस अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी, जिससे (Mountain Road Safety) के दावों पर एक बार फिर सवालिया निशान लग गए हैं। इस हृदयविदारक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, जहां चीख-पुकार के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन की चुनौती खड़ी हो गई।

शिलापनी के पास अनियंत्रित होकर काल के गाल में समाई बस
यह दर्दनाक हादसा (Almora Bus Accident) भिकियासैंण–विनायक–जालली मोटर मार्ग पर शिलापनी के पास हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस भिकियासैंण से रामनगर की ओर जा रही थी, तभी अचानक चालक ने वाहन पर से अपना संतुलन खो दिया। (Vehicle Control Failure) की वजह से बस सड़क किनारे लगी सुरक्षा दीवार को तोड़ते हुए सैकड़ों फीट नीचे गहरी खाई में गिर गई। हादसे के वक्त बस में काफी संख्या में लोग सवार थे, जिन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला।
हादसे में सात जिंदगियां खत्म और रेस्क्यू में जुटी SDRF की टीम
दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें हरकत में आ गईं। घटनास्थल की दुर्गमता को देखते हुए तत्काल (Disaster Relief Operation) के लिए SDRF की टीम को भेजा गया। मलबे और चट्टानों के बीच फंसी बस से यात्रियों को निकालने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया गया। दुर्भाग्य से इस हादसे में अब तक 7 यात्रियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
घायलों की स्थिति गंभीर और भिकियासैंण अस्पताल में हाहाकार
हादसे में घायल हुए 12 यात्रियों को कड़ी मशक्कत के बाद खाई से बाहर निकाला गया और एम्बुलेंस के जरिए भिकियासैंण के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों की हालत अत्यंत (Emergency Medical Treatment) की मांग कर रही है, क्योंकि कई यात्रियों को सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई हैं। अस्पताल परिसर में घायलों के परिजनों की भीड़ जमा है और हर तरफ सिसकियों और अपनों को ढूंढने की व्याकुलता देखी जा रही है।
मृतकों की पहचान और जमोली गांव में छाया सन्नाटा
हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग स्थानीय निवासी बताए जा रहे हैं। मृतकों में 80 वर्षीय गोविंद वल्लभ और उनकी 75 वर्षीय पत्नी पार्वती देवी शामिल हैं, जिनका पूरा परिवार (Victim Identification Process) के बाद शोक में डूबा हुआ है। इसके अलावा सूबेदार नन्दन सिंह, तारा देवी, गणेश और उमेश की भी मौत हो गई है। एक अन्य मृतक की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। इन मौतों ने स्थानीय गांवों में मातम का माहौल पैदा कर दिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने व्यक्त की गहरी संवेदनाएं
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसे ‘अत्यंत पीड़ादायक और हृदयविदारक’ घटना करार दिया है। (State Government Response) के तहत सीएम ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि घायलों के उपचार में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जो यात्री गंभीर हैं, उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों में एयरलिफ्ट या एम्बुलेंस के जरिए तत्काल रेफर किया जाए।
जिला मुख्यालय से दूरी ने बढ़ाई बचाव कार्य की चुनौतियां
हादसे वाली जगह जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर है, जिसके कारण (Remote Area Rescue) की प्रक्रिया में शुरुआती बाधाएं आईं। संकरे पहाड़ी रास्ते और मोबाइल नेटवर्क की समस्या ने सूचनाओं के आदान-प्रदान को कठिन बना दिया था। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासनिक टीमों के पहुंचने से पहले ही अपने स्तर पर घायलों की मदद शुरू कर दी थी। पुलिस अब दुर्घटना के कारणों की बारीकी से जांच कर रही है कि क्या यह मानवीय भूल थी या बस में कोई तकनीकी खराबी।
पहाड़ों पर बढ़ते हादसों और सुरक्षा मानकों पर उठते सवाल
उत्तराखंड के पहाड़ी मार्गों पर लगातार हो रहे बस हादसे सरकार और परिवहन विभाग के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। खराब सड़कें और (Road Infrastructure Security) की कमी अक्सर मासूमों की जान ले लेती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन रास्तों पर क्रैश बैरियर की कमी और ओवरलोडिंग भी दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बनती है। इस ताजा हादसे ने एक बार फिर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।
घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना और प्रशासन की निगरानी
प्रशासनिक अधिकारियों का दल लगातार अस्पताल में घायलों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। ड्राइवर नवीन चंद्र समेत कई घायल (Trauma Care Recovery) के दौर से गुजर रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने स्वयं अधिकारियों से संपर्क कर अपडेट लिया है और दिवंगतों की आत्मा की शांति की प्रार्थना की है। पूरा प्रदेश इस समय शोकाकुल परिवारों के साथ खड़ा है और घायलों के जल्द ठीक होने की उम्मीद कर रहा है।



