WomenReservationBill – बिल पर टकराव तेज, बढ़ी सियासी बयानबाजी
WomenReservationBill – महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से लंबित इस बिल के पारित न होने पर विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में शुक्रवार देर रात राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने विधानभवन के सामने विरोध दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के खिलाफ नाराजगी जताते हुए उनके झंडे जलाए और बिल को लेकर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।

विरोध प्रदर्शन के जरिए जताई नाराजगी
अपर्णा यादव ने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा वर्षों से लंबित है, जिससे देश की महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रहना पड़ रहा है। उनका कहना था कि इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने में देरी महिलाओं के सशक्तिकरण की प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल इस विषय पर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं, जिसके कारण यह मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
विपक्ष पर लगाए गए आरोप
राज्य महिला आयोग की ओर से विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। अपर्णा यादव ने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के चलते यह विधेयक अब तक अटका हुआ है। उनका मानना है कि यदि सभी दल इस मुद्दे पर एकजुट हों, तो इसे आसानी से आगे बढ़ाया जा सकता है। इस मुद्दे को लेकर महिला आयोग की अन्य सदस्य भी सक्रिय नजर आईं।
सपा कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन
इस मामले को लेकर राज्य महिला आयोग की कुछ सदस्यों ने समाजवादी पार्टी के प्रदेश कार्यालय के बाहर भी विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों को लेकर अपनी मांगों को दोहराया और इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति अपनाने की बात कही। आयोग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस विषय पर और बड़े स्तर पर प्रदर्शन किए जा सकते हैं।
अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में महिलाएं हैं, ऐसे में प्रदर्शन के लिए और अधिक महिलाओं की भागीदारी होनी चाहिए थी। उनका यह बयान राजनीतिक माहौल को और गरमा गया है।
सरकार की ओर से समर्थन का दावा
उधर, राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने महिला आरक्षण को लेकर अपना समर्थन दोहराया है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि लंबे समय से महिलाओं को उनके अधिकार नहीं मिल पाए हैं और अब इस दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल को देशभर में सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।
आगे की स्थिति पर नजर
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों के बीच अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। विभिन्न दलों के बीच जारी बयानबाजी से यह स्पष्ट है कि यह मुद्दा आने वाले समय में भी चर्चा के केंद्र में बना रहेगा।