उत्तर प्रदेश

Solar Energy – लखनऊ में छतों से बन रही बिजली, घट रहा बिल

Solar Energy – लखनऊ में बिजली की बढ़ती मांग के बीच अब लोग पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय खुद ऊर्जा उत्पादन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत शहर के हजारों घरों की छतों पर सोलर पैनल लग चुके हैं, जिससे न केवल बिजली बिल में कमी आई है बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी प्रगति हुई है। वर्तमान में जिले की कुल बिजली आवश्यकता लगभग 1500 मेगावाट है, जिसमें से करीब 20 प्रतिशत आपूर्ति अब घरों में लगे सोलर संयंत्रों से ही हो रही है।

घरों से हो रहा उल्लेखनीय बिजली उत्पादन

उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण के अनुसार, लखनऊ में घरेलू सोलर पैनलों से करीब 328 मेगावाट बिजली तैयार हो रही है। यह आंकड़ा बताता है कि अब आम उपभोक्ता भी ऊर्जा उत्पादन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जिन घरों में पहले बिजली खर्च को लेकर चिंता रहती थी, वहीं अब वही घर अपने उपयोग की बिजली खुद तैयार कर रहे हैं। इससे न सिर्फ बिजली का खर्च कम हुआ है, बल्कि बिजली आपूर्ति पर दबाव भी घटा है।

तीन वर्षों में तेजी से बढ़ी सोलर पहुंच

पिछले कुछ वर्षों में सोलर पैनल लगाने का चलन तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2024-25 में जहां कुछ हजार लोगों ने इस दिशा में कदम बढ़ाया, वहीं अगले दो वर्षों में यह संख्या कई गुना बढ़ गई। 2025-26 और 2026-27 में बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घरों पर सोलर सिस्टम लगवाए। वर्ष 2027-28 के लिए तय लक्ष्य के करीब पहुंचते हुए अब तक 92 हजार से अधिक संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जो इस योजना की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।

अनुदान और आसान वित्तीय विकल्प

इस योजना के तहत सरकार उपभोक्ताओं को आकर्षक सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। एक किलोवाट क्षमता के संयंत्र पर 45 हजार रुपये तक की सहायता दी जा रही है, जबकि दो किलोवाट और उससे अधिक क्षमता के लिए यह राशि और बढ़ जाती है। इसके अलावा, सोलर प्लांट लगाने के लिए बैंक से किफायती दर पर ऋण की सुविधा भी मिल रही है। इससे मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए भी इस तकनीक को अपनाना आसान हो गया है। तीन किलोवाट के प्लांट के लिए ली गई राशि की मासिक किस्त भी सीमित रहती है, जिससे आर्थिक बोझ ज्यादा महसूस नहीं होता।

लंबी अवधि में मिल रहा फायदा

सोलर पैनल एक बार लगाने के बाद कई वर्षों तक लाभ देते हैं। योजना के तहत उपभोक्ताओं को हर महीने करीब 300 यूनिट तक बिजली का लाभ मिलता है, जिससे बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आती है। साथ ही, सोलर संयंत्रों की उम्र लगभग 25 वर्ष तक मानी जाती है, जिससे यह एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में भी उपयोगी साबित हो रहा है। उपभोक्ताओं का अनुभव भी सकारात्मक रहा है और वे इसे भविष्य की जरूरत के रूप में देख रहे हैं।

किसानों के लिए भी उपयोगी साबित हो रही योजना

शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी सोलर ऊर्जा का उपयोग बढ़ रहा है। पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत जिले के 1800 से अधिक किसान सोलर पंप के जरिए सिंचाई कर रहे हैं। इन किसानों को अनुदान पर सोलर सिस्टम उपलब्ध कराया गया है, जिससे उनकी पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम हुई है। फिलहाल ये सिस्टम ग्रिड से जुड़े नहीं हैं, लेकिन भविष्य में इन्हें जोड़ने की योजना है, जिससे अतिरिक्त बिजली का उपयोग और बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

आवेदन और लाभार्थियों के आंकड़े

योजना के प्रति लोगों की रुचि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ता पोर्टल पर आवेदन कर चुके हैं। इनमें से अधिकांश ने वेंडर का चयन कर लिया है और हजारों लोगों को सब्सिडी का लाभ भी मिल चुका है। सोलर प्लांट की स्थापना के बाद सब्सिडी सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है।

कुल मिलाकर, लखनऊ में सोलर ऊर्जा का बढ़ता उपयोग यह संकेत देता है कि आने वाले समय में पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता और कम हो सकती है। यह बदलाव न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से भी फायदेमंद साबित हो रहा है।

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