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StockMarket – पश्चिम एशिया से राहत संकेतों पर शेयर बाजार में मजबूत उछाल

StockMarket – पश्चिम एशिया से तनाव कम होने के संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को सकारात्मक शुरुआत की और शुरुआती कारोबार में ही मजबूत बढ़त दर्ज की। सेंसेक्स करीब 359 अंक चढ़कर 77,245 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 100 अंकों से अधिक उछलकर 24,000 के पार निकल गया। निवेशकों की धारणा को उस खबर से बल मिला, जिसमें ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य गतिविधियां रोकने के प्रस्ताव की बात सामने आई। इससे क्षेत्र में संभावित तनाव कम होने की उम्मीद जगी है।

वैश्विक संकेतों से बाजार को मिला सहारा

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिले सकारात्मक संकेतों का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दिया। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स ने 500 अंकों से अधिक की छलांग लगाते हुए 77,400 के करीब पहुंचकर कारोबार किया। वहीं निफ्टी 150 अंकों की बढ़त के साथ 24,150 के स्तर के ऊपर टिकता नजर आया। निवेशकों का रुझान व्यापक रूप से खरीदारी की ओर रहा, जिससे बाजार में उत्साह का माहौल बना।

छोटे और मझोले शेयरों में भी दिखी तेजी

सिर्फ बड़ी कंपनियां ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में करीब 0.7 प्रतिशत और मिडकैप 100 इंडेक्स में लगभग 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि बाजार में निवेशकों का भरोसा केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर सकारात्मकता बनी हुई है।

कंपनी परिणामों का असर, कुछ शेयर चमके

तिमाही नतीजों के चलते कुछ कंपनियों के शेयरों में खासा उछाल देखने को मिला। फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स से जुड़ी कंपनी के शेयरों में 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिससे वह प्रमुख बढ़त हासिल करने वाले शेयरों में शामिल रही। इसके अलावा मारुति सुजुकी, अदाणी पोर्ट्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इन्फोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे दिग्गज शेयरों में भी 3 प्रतिशत तक की मजबूती देखी गई। हालांकि, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फिनसर्व और एक्सिस बैंक जैसे कुछ शेयर हल्की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

कच्चे तेल की कीमतें बनी चिंता का कारण

बाजार में तेजी के बावजूद कुछ जोखिम अब भी बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 111 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे भारत में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव

विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए एक चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हाल ही में एफआईआई ने 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के शेयरों की शुद्ध बिक्री की है। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े सेक्टर में तेजी के कारण विदेशी निवेशक अपना रुख उन बाजारों की ओर मोड़ रहे हैं, जिससे भारतीय बाजार में पूंजी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है।

रुपये में कमजोरी के संकेत

विदेशी निवेश की निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर भारतीय मुद्रा पर भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में रुपया 11 पैसे गिरकर डॉलर के मुकाबले 94.79 के स्तर पर आ गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आयातकों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ने के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है, जिससे इसकी स्थिरता प्रभावित हो रही है।

आगे की दिशा पर टिकी निगाहें

बाजार की आगामी चाल काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। खासतौर पर यह देखना अहम होगा कि ईरान के प्रस्ताव पर अमेरिका का क्या रुख रहता है। इसके अलावा घरेलू राजनीतिक संकेत, राज्यों के चुनावी अनुमान और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जब तक वैश्विक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

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