Power Sector Reform – ताप विद्युत परियोजनाओं के निजीकरण पर बढ़ा विवाद
Power Sector Reform – राज्य विद्युत उत्पादन निगम की पनकी और जवाहरपुर ताप विद्युत परियोजनाओं के संचालन और अनुरक्षण को निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस दिशा में टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आते ही बिजली कर्मचारी संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। वर्षों से निगम के अधीन संचालित इन परियोजनाओं में बड़ी संख्या में नियमित और संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनके भविष्य को लेकर अब अनिश्चितता बढ़ गई है।

निजी कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 13 अप्रैल को निगम के अधीक्षण अभियंता की ओर से संबंधित परियोजनाओं के मुख्य प्रबंधकों को पत्र भेजकर संचालन और रखरखाव के लिए संयुक्त टेंडर प्रस्ताव मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। अब तक इन परियोजनाओं का संचालन पूरी तरह राज्य विद्युत उत्पादन निगम के हाथों में रहा है, लेकिन प्रस्तावित बदलाव से कार्यप्रणाली में बड़ा परिवर्तन संभव है। इस कदम को लेकर कर्मचारी संगठनों में असंतोष तेजी से बढ़ रहा है।
परियोजनाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारी तैनात
कानपुर स्थित पनकी ताप विद्युत परियोजना में करीब 100 इंजीनियर, 75 जूनियर इंजीनियर, 75 तकनीशियन ग्रेड-2 और लगभग 245 अन्य कर्मचारी कार्यरत हैं। इसके अलावा 500 से अधिक संविदा कर्मी भी यहां जुड़े हुए हैं। इसी तरह एटा के जवाहरपुर परियोजना में भी बड़ी संख्या में तकनीकी और गैर-तकनीकी कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यदि संचालन निजी हाथों में जाता है, तो इन कर्मचारियों की स्थिति पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों का विरोध तेज
बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया है। समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि यह निर्णय लागू होता है, तो करीब दो हजार से अधिक कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। उनका आरोप है कि यह कदम लाभ में चल रही सरकारी इकाई को कमजोर करने और धीरे-धीरे सार्वजनिक क्षेत्र को खत्म करने की दिशा में उठाया जा रहा है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
स्मार्ट मीटर पर भी उठे सवाल
इसी बीच पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में लगाए गए स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर भी विवाद सामने आया है। आंकड़ों के अनुसार, इन मीटरों के लगने के बाद बिजली खपत में करीब 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, निगम अब तक इस बढ़ोतरी का स्पष्ट कारण बताने में सफल नहीं हो पाया है। इस स्थिति ने उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ा दी है।
उपभोक्ता परिषद ने उठाई जांच की मांग
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए विद्युत नियामक आयोग से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। परिषद का कहना है कि इतनी बड़ी वृद्धि सामान्य नहीं मानी जा सकती और इससे मीटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं। परिषद के अध्यक्ष ने इसे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है।
निगम ने जांच प्रक्रिया का दिया आश्वासन
निगम की ओर से यह जानकारी दी गई है कि मीटरों के नमूनों की जांच विशेषज्ञ संस्थान में कराई जा रही है। साथ ही कुछ उपभोक्ताओं के यहां अतिरिक्त मीटर लगाकर तुलना की जा रही है। हालांकि, लगभग एक महीने बीतने के बाद भी कोई ठोस निष्कर्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि केवल आंशिक जांच पर्याप्त नहीं है और पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश के बिजली क्षेत्र में नीतिगत बदलाव, कर्मचारियों की सुरक्षा और उपभोक्ताओं के हित जैसे कई अहम मुद्दों को एक साथ केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस पर प्रशासन और संबंधित संस्थाओं का रुख महत्वपूर्ण रहेगा।