उत्तर प्रदेश

Lucknow RTO Corruption Scandal: आरटीओ में डिजिटल लूट का हुआ भंडाफोड़, जांच के दौरान रोने लगी महिला कर्मचारी

Lucknow RTO Corruption Scandal: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित आरटीओ कार्यालय से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सरकारी सिस्टम में सेंध लगाने वाले ठेका कर्मचारियों की पोल खोल दी है। ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों के ट्रांसफर जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए तैनात निजी कंपनी के कर्मचारियों और दलालों के बीच (Illegal RTO Broker Nexus) का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि आम जनता की गाढ़ी कमाई लूटने के लिए वाट्सएप चैट और मोबाइल वॉलेट का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था।

Lucknow RTO Corruption Scandal
Lucknow RTO Corruption Scandal

वाट्सएप चैट में खुला उगाही का गंदा खेल

आरटीओ कार्यालय में सिल्वर टच नामक कंपनी को डीएल और वाहन ट्रांसफर के कार्यों का ठेका मिला हुआ है। शिकायत मिलने पर जब (Official Mobile Investigation) की गई, तो कर्मचारी कपिल दीप के मोबाइल ने सारे राज उगल दिए। चैट से पता चला कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर लोगों से 4000 रुपये तक की मांग की जा रही थी। भ्रष्टाचार की हद तो तब हो गई जब लोगों को डराने के लिए यह तक कहा गया कि ‘एक जनवरी से पहले काम करा लो, वरना 10,000 रुपये का खर्चा आएगा।’

ऑनलाइन वॉलेट में लिए जा रहे थे रिश्वत के पैसे

जांच टीम को कपिल दीप के मोबाइल में पैसों के लेनदेन के पुख्ता सबूत मिले हैं। एक चैट में एक व्यक्ति ने कर्मचारी के मोबाइल वॉलेट में एक हजार रुपये भेजकर (Learning License Bribery) के लिए अनुरोध किया था। कर्मचारी दलालों के साथ मिलकर फाइलों को आगे बढ़ाने और बैकडोर से काम करने का सिंडिकेट चला रहा था। सिस्टम की इस पारदर्शिता को ठेका कर्मचारियों ने अपनी कमाई का जरिया बना लिया था, जिससे ईमानदार आवेदकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

जांच के दौरान मचा हंगामा और महिलाकर्मी के आंसू

मोबाइल फोन की चेकिंग के दौरान आरटीओ कार्यालय में उस वक्त हाई-वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया जब एक महिला कर्मचारी फूट-फूटकर रोने लगी। आरोप है कि जांच कर रहे अधिकारियों ने महिलाकर्मी के मोबाइल के (Personal Photo Privacy Violation) का उल्लंघन किया। महिला का कहना था कि मना करने के बावजूद अधिकारी उसका निजी फोटो फोल्डर देख रहे थे। इस घटना के बाद कार्यालय में जांच टीम और कर्मचारियों के बीच काफी तीखी बहस भी हुई, जिससे काम-काज कुछ देर के लिए प्रभावित रहा।

आरटीओ प्रशासन की सख्त कार्रवाई की चेतावनी

पूरे मामले पर आरटीओ प्रशासन संजय तिवारी ने स्पष्ट किया है कि विभाग भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। जांच में (Contractual Staff Involvement) की पुष्टि होने के बाद आरोपी कर्मचारी कपिल दीप के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। संजय तिवारी ने बताया कि सिल्वर टच कंपनी के कर्मचारियों की दलालों के साथ सांठगांठ की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं, जिसकी पुष्टि अब डिजिटल साक्ष्यों के माध्यम से हो चुकी है।

नए साल का डर दिखाकर वसूली की साजिश

भ्रष्ट कर्मचारियों ने उगाही का एक नया तरीका खोज निकाला था, जिसमें वे सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें फैला रहे थे। चैट में कर्मचारी ने एक न्यूज कटिंग का सहारा लेकर लोगों को (Driving License Fee Hike Rumors) के नाम पर डराया। उन्हें मैसेज भेजा गया कि दिसंबर के बाद लाइसेंस बनवाना बहुत महंगा हो जाएगा। इस ‘डेडलाइन’ का डर दिखाकर दलाल और कर्मचारी मिलकर मासूम लोगों से मोटी रकम वसूलने की फिराक में थे।

सिल्वर टच कंपनी की भूमिका पर उठे सवाल

निजी कंपनी सिल्वर टच के प्रबंधन पर भी अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उनके कर्मचारी कार्यालय समय में (System Security Breach) कैसे कर रहे थे। विभाग अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या इस रैकेट में कुछ स्थायी अधिकारी भी शामिल हैं या यह केवल ठेका कर्मियों तक सीमित है। लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ में हुई इस कार्रवाई के बाद अन्य आरटीओ दफ्तरों में भी हड़कंप मच गया है और दलालों ने दफ्तर से दूरी बना ली है।

आम जनता के लिए आरटीओ की विशेष सलाह

इस घटना के बाद आरटीओ विभाग ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी काम के लिए बिचौलियों या दलालों के झांसे में न आएं। किसी भी तरह की (Online RTO Services) के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का ही उपयोग करें। विभाग का कहना है कि अगर कोई कर्मचारी या दलाल पैसों की मांग करता है, तो तुरंत उच्चाधिकारियों को सूचित करें। फिलहाल, इस खुलासे ने लखनऊ आरटीओ की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा दाग लगा दिया है, जिसे साफ करने की चुनौती प्रशासन के सामने है।

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