IASResignation – उपेक्षा और व्यवस्था से असंतोष में युवा आईएएस ने छोड़ी सेवा
IASResignation – 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने सेवा से इस्तीफा देकर प्रशासनिक तंत्र के भीतर कामकाज को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अपने त्यागपत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें जो वेतन, सुविधाएं और सम्मान मिल रहा था, उसके अनुरूप वे सार्थक योगदान नहीं दे पा रहे थे। यह स्थिति उनके लिए एक गहरे नैतिक द्वंद्व का कारण बन गई थी। उन्होंने संकेत दिया कि कई स्तरों पर काम करने की इच्छा के बावजूद उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिले।

कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
राही ने अपने पत्र में लिखा कि जहां भी कार्य करने का अवसर मिलता है, वहां पहले से जमी हुई व्यवस्थाएं और परंपराएं कामकाज में बाधा बनती हैं। उन्होंने कहा कि कई बार शासनादेशों को उनके मूल उद्देश्य के अनुसार लागू करना संभव नहीं हो पाता। निष्पक्ष तरीके से अपनी बात रखने और सुनवाई का अवसर भी सीमित रहता है, जिससे समस्याएं और जटिल हो जाती हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति एक अधिकारी के काम करने की स्वतंत्रता को प्रभावित करती है।
संवैधानिक मूल्यों से समझौते का दबाव
अपने इस्तीफे में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि व्यवहारिक स्तर पर ऐसी कई व्यवस्थाएं मौजूद हैं जो औपचारिक रूप से स्वीकार्य नहीं हैं, लेकिन कार्यप्रणाली का हिस्सा बन चुकी हैं। राही के मुताबिक, वरिष्ठ स्तर से यह संकेत भी मिला कि वर्तमान व्यवस्था में बिना समझौते के काम करना कठिन है। उन्होंने इसे एक गंभीर चुनौती बताया, जो किसी भी ईमानदार अधिकारी के लिए असहज स्थिति पैदा करती है।
त्यागपत्र को बताया तकनीकी निर्णय
रिंकू सिंह राही ने अपने इस्तीफे को “तकनीकी त्यागपत्र” बताते हुए कहा कि यह कदम न तो स्वेच्छा से उठाया गया है और न ही किसी चुनौती से घबराकर। उन्होंने कहा कि सेवा के शुरुआती चरण में ही उन्हें पर्याप्त जिम्मेदारियां नहीं दी गईं, जिससे वे अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर सके। उन्होंने यह भी लिखा कि वेतन और सुविधाएं मिलती रहीं, लेकिन वास्तविक कार्य करने के अवसर सीमित रहे। उन्होंने अनुरोध किया कि उन्हें उनकी पूर्व सेवा में वापस भेजा जाए।
पूर्व सेवा में भी रहा संघर्ष का अनुभव
आईएएस बनने से पहले राही जिला समाज कल्याण अधिकारी के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2009 में मुजफ्फरनगर में नियुक्ति के कुछ ही महीनों बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर उन पर जानलेवा हमला हुआ था। इस घटना के कारण वे स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए। इसके बावजूद उन्होंने संघर्ष जारी रखा और दिव्यांग श्रेणी में आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण कर सेवा में आए। उनका यह सफर उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
बिना कार्य के वेतन लेने से किया इंकार
राही ने अपने त्यागपत्र में यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने बिना कार्य के वेतन स्वीकार न करने की बात उच्च अधिकारियों से कही थी। हालांकि, इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त जिम्मेदारियां नहीं सौंपी गईं। उन्होंने कुछ प्रशासनिक सुधारों से जुड़े मुद्दों पर भी पहल करने की कोशिश की, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इससे उनकी निराशा और बढ़ी।
एसोसिएशन पर भी जताई नाराजगी
आईएएस एसोसिएशन को लेकर भी उन्होंने असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जूनियर अधिकारियों की नैतिक चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता। इस संदर्भ में उन्होंने एसोसिएशन से खुद को अलग करने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी मांगी थी। उनके मुताबिक, यह स्थिति संस्थागत संवेदनशीलता में कमी को दर्शाती है।
परिवार ने जताया भरोसा
रिंकू सिंह राही के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद उनके परिवार ने आश्चर्य जताया, लेकिन उनके फैसले पर भरोसा भी व्यक्त किया। उनके पिता सौदान सिंह राही ने कहा कि रिंकू ने हमेशा ईमानदारी को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें बड़े आर्थिक प्रलोभन दिए गए, लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।



