FakeDoctorCase – केजीएमयू मामले में तेज हुई नेटवर्क और सहयोगियों की तलाश
FakeDoctorCase – लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस और प्रशासन अब उन कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं, जिनके जरिए आरोपी ने अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों में अपनी पहचान बनाई थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह कई मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में नियमित रूप से जाता था और खुद को डॉक्टर बताकर परिचय स्थापित करता था।

मेडिकल संस्थानों में पहुंच की जांच
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी किन-किन संस्थानों में संपर्क में था, इसकी सूची तैयार की जा रही है। संबंधित संस्थानों को नोटिस भेजने की तैयारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने वहां किस तरह अपनी पहुंच बनाई। बताया जा रहा है कि कुछ जगहों पर उसे चिकित्सकों के बीच एक पेशेवर के रूप में पेश किया जाता था, जिससे उसकी विश्वसनीयता बढ़ती गई।
फर्जी दस्तावेजों की पड़ताल जारी
जांच एजेंसियों को शक है कि आरोपी ने अपनी पहचान को मजबूत करने के लिए जाली शैक्षिक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। इसी को ध्यान में रखते हुए अब उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जा रही है। साथ ही, ऐसे दस्तावेज तैयार करने में किन लोगों की भूमिका हो सकती है, इसका भी पता लगाया जा रहा है। हालांकि अब तक आरोपी ने अपने सहयोगियों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी है।
डिजिटल सबूतों के आधार पर पूछताछ
पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर हुई बातचीत के आधार पर कुछ संदिग्ध लोगों की पहचान कर चुकी है। इन लोगों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि डिजिटल साक्ष्य इस मामले में अहम भूमिका निभा सकते हैं और इससे नेटवर्क की संरचना को समझने में मदद मिलेगी।
सहयोगियों के छिपने की आशंका
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपी के करीबी कुछ लोग फिलहाल संपर्क से बाहर हैं। उनके फोन बंद बताए जा रहे हैं, जिससे उनके ठिकानों का पता लगाना चुनौती बन गया है। पुलिस ने आरोपी के आवास पर भी तलाशी ली है और परिवार के सदस्यों से पूछताछ की है। परिवार ने मामले में किसी जानकारी से इनकार किया है, लेकिन पुलिस का कहना है कि सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
आर्थिक लेनदेन की जांच
धन के स्रोत का पता लगाने के लिए आरोपी के बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। यह देखा जा रहा है कि खातों में आने वाली रकम कहां से आई और किन-किन लोगों से लेनदेन हुआ। इसके साथ ही अन्य मामलों में गिरफ्तार व्यक्तियों से संभावित संबंधों की भी जांच की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट हो सके।
विदेश यात्रा और संपर्कों पर नजर
पुलिस ने आरोपी का पासपोर्ट जब्त कर लिया है और उसकी विदेश यात्राओं का विवरण खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी जानने की कोशिश कर रही हैं कि विदेश में उसके किन लोगों से संपर्क थे और क्या इनका इस मामले से कोई संबंध है। इस पहलू को भी गंभीरता से जांच के दायरे में रखा गया है।
छात्रों और संस्थान से जुड़े पहलुओं की जांच
मामले में एक तकनीकी पाठ्यक्रम से जुड़े छात्र का नाम भी सामने आया है, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसका परीक्षा परिणाम फिलहाल रोक दिया है। प्रशासन ने उससे जवाब मांगा है और उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है। इसके अलावा, कुछ शिविरों में शामिल रहे छात्रों की पहचान भी की जा रही है, जिनसे पूछताछ कर जानकारी जुटाई जाएगी।
नेटवर्क के विस्तार की आशंका
जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी का संपर्क दायरा काफी व्यापक था, जिसमें विभिन्न संस्थानों के छात्र-छात्राएं शामिल हो सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए जांच को कई दिशाओं में आगे बढ़ाया जा रहा है।