Encroachment – कैसरबाग कोर्ट परिसर के अवैध कब्जों पर सख्त हुआ हाईकोर्ट
Encroachment – लखनऊ में कैसरबाग स्थित जनपद न्यायालय और आसपास के इलाकों में लंबे समय से चले आ रहे अतिक्रमण के मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि नगर निगम द्वारा चलाए जाने वाले अतिक्रमण हटाओ अभियान के लिए पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए, ताकि कार्रवाई बिना किसी बाधा के पूरी की जा सके। अदालत ने अगली सुनवाई तक संबंधित अधिकारियों से विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट भी तलब की है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने अनुराधा सिंह और अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि सार्वजनिक स्थलों और न्यायालय परिसर के आसपास अवैध कब्जों को लेकर अब ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
72 अतिक्रमण चिह्नित किए गए
मामले में नगर निगम की ओर से अदालत में दाखिल रिपोर्ट में बताया गया कि कैसरबाग और आसपास के क्षेत्र में कुल 72 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या अधिवक्ताओं के चैंबर और अस्थायी दुकानों की है। रिपोर्ट के अनुसार, इन कब्जों के कारण आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और कई सरकारी कार्यालयों तक पहुंच भी प्रभावित हो रही है।
अदालत ने पहले भी नगर निगम को निर्देश दिए थे कि अवैध कब्जों को हटाने की प्रक्रिया को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा था कि यदि अभियान के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की आवश्यकता हो, तो प्रशासन तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित करे।
पुलिस बल न मिलने का कारण बताया गया
हालिया सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने अदालत में कई अधिकारियों के पत्र पेश किए। इनमें डीसीपी मुख्यालय, डीसीपी पश्चिम और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त पश्चिम के पत्र शामिल थे। इन पत्रों में बताया गया कि पूर्व निर्धारित तारीख पर पुलिस बल उपलब्ध न करा पाने के पीछे कुछ प्रशासनिक और अपरिहार्य परिस्थितियां थीं।
अदालत ने इन कारणों को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि पिछली तारीख पर परिस्थितियों के चलते बल उपलब्ध नहीं कराया जा सका, लेकिन अगली कार्रवाई में नगर निगम को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि तय तिथि पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रभावी ढंग से पूरी कराई जाए।
12 मई को प्रस्तावित है अभियान
नगर निगम की ओर से अदालत को जानकारी दी गई कि अतिक्रमण हटाने के लिए 12 मई की नई तारीख तय की गई है। इस पर हाईकोर्ट ने प्रशासन से कहा कि कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए पहले से समुचित तैयारी की जाए। साथ ही अदालत ने 15 दिनों के भीतर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा है।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि अदालत की सख्ती के बाद अब इस इलाके में वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जा सकता है।
आम लोगों की परेशानी का भी हुआ जिक्र
सुनवाई के दौरान अदालत ने उन समस्याओं का भी उल्लेख किया, जिनका सामना स्थानीय लोगों को अतिक्रमण के कारण करना पड़ रहा है। कोर्ट ने कहा कि जनपद न्यायालय, पुराना हाईकोर्ट परिसर, कलेक्ट्रेट, बलरामपुर अस्पताल, कैसरबाग बस अड्डा और अन्य सरकारी संस्थानों के आसपास अवैध कब्जों से यातायात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
अदालत ने एक ऐसी घटना का भी उल्लेख किया, जिसमें रास्ता बाधित होने के कारण एंबुलेंस समय पर नहीं निकल सकी थी और मरीज की जान चली गई थी। कोर्ट ने इसे गंभीर स्थिति बताते हुए सार्वजनिक मार्गों को खाली कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।