DeathSentence – बांदा में 34 बच्चों के शोषण मामले में दंपती को हुई फांसी
DeathSentence – उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में चर्चित बाल यौन शोषण प्रकरण में विशेष अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। सिंचाई विभाग के निलंबित जूनियर इंजीनियर रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को 34 नाबालिगों के साथ यौन अपराध और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार के आरोप में मृत्युदंड दिया गया है। अदालत ने इस मामले को अत्यंत गंभीर और दुर्लभ श्रेणी का अपराध मानते हुए कठोरतम सजा उचित बताई। तीसरे आरोपी के खिलाफ कार्यवाही अलग रखी गई है, जिसे ई-मेल के जरिए सामग्री साझा करने के आरोप में नामजद किया गया था।

अदालत में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पेश
सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने मेडिकल रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे। जब्त की गई पेन ड्राइव, लैपटॉप और मोबाइल उपकरणों से बरामद सामग्री को अदालत में प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने रिकॉर्डिंग और अन्य प्रमाणों का अवलोकन करने के बाद आरोपों को सिद्ध माना। जांच एजेंसी के अनुसार, लंबे प्रयासों के बाद पुराने वीडियो फुटेज के आधार पर पीड़ित बच्चों की पहचान संभव हो सकी।
पीड़ितों की पहचान और मेडिकल जांच
जांच के दौरान कुल 34 बच्चों की पहचान की गई, जिनके साथ कथित रूप से शोषण हुआ था। पीड़ितों के बयान और दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में कराई गई चिकित्सीय जांच को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया। पांच सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने बांदा आकर बच्चों का परीक्षण किया था। जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में अपराध की पुनरावृत्ति हुई थी।
पत्नी की भूमिका पर भी टिप्पणी
जांच एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि आरोपित की पत्नी की भूमिका भी सक्रिय पाई गई। अदालत में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, बच्चों को बहलाने और बुलाने में सहयोग किया गया। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आर्थिक लाभ के लिए अपराध को अंजाम दिया गया और आपत्तिजनक सामग्री को साझा कर धन अर्जित किया गया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के संगठित अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं।
न्यायालय का विस्तृत निर्णय
विशेष पॉक्सो अदालत के न्यायाधीश ने 163 पृष्ठों के फैसले में अपराध को जघन्यतम श्रेणी में रखा। आदेश में उल्लेख किया गया कि कई जिलों में घटनाएं सामने आईं और दोषियों का आचरण नैतिक रूप से अत्यंत गिरा हुआ पाया गया। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में सुधार की संभावना न्यूनतम है, इसलिए कठोर दंड आवश्यक है। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे को 10 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए।
जांच और गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
केंद्रीय जांच एजेंसी ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गहन जांच की। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। आरोप है कि सोशल मीडिया माध्यमों से भी सामग्री साझा की गई और कुछ परिवारों को धमकी देकर धन की मांग की गई। जांच में संदिग्ध स्वास्थ्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आरोपी का चिकित्सीय परीक्षण भी कराया गया था।
सजा के बाद की स्थिति
फैसला सुनाए जाने के बाद दोषियों को न्यायालय परिसर से सुरक्षा व्यवस्था के बीच बाहर ले जाया गया। इस मामले ने स्थानीय समुदाय को गहराई से प्रभावित किया। घटना के बाद संबंधित आवास को लेकर भी चर्चा रही और लंबे समय तक वह खाली पड़ा रहा। अदालत के निर्णय को बाल सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



